पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि जीवन की हर सफलता और ऊंचाई किसी बुनियाद पर टिकी होती है। कुटीर द्वारा संचालित यह बुनियाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व कुटीर संस्थान के संस्थापक अभयजीत दुबे के स्वप्नों को अवश्य ही साकार करेगा।
बुधवार को महाविद्यालय परिसर में आयोजित गीता जयंती एवं कुटीर महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती वर्ष श्रृंखला के तहत आयोजित कार्यक्रम बुनियाद में बच्चों को खेल एवं पाठ्य सामग्री प्रदान करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रही थंी। उन्होंने कहा कि कुटीर संस्थान परिसर में समाज के साधनहीन घरों के छोटे बच्चों को विद्यालय समय के उपरांत स्वतंत्र रूप से शिक्षा दी जाती है। आचार्य के रूप में राघवेंद्र दुबे के संयोजकत्व में संस्थान के शिक्षक और विद्यार्थी ही समय दान देते हैं। शिक्षा से वंचित अथवा परिस्थिति जन्य कारणों से नियमित विद्यालय नहीं जा पाने वाले लगभग 150 बच्चे प्रतिदिन अपने आचार्यो के संरक्षण में किताबी बोझ से मुक्त खेल, मनोरंजन और संवाद के माध्यम से भाषा, विज्ञान,गणित और सामान्य ज्ञान की शिक्षा प्राप्त कर रहे है। यह कार्यक्रम संस्थान के स्थापना के चरम लक्ष्यों से अभिप्रेरित है। जिसे व्वयस्थापक डॉ. अजयेंद्र कुमार दुबे द्वारा बुनियाद नाम दिया गया है। बच्चों की सामूहिक प्रार्थना और अन्य सामूहिक प्रदर्शन को देखकर अविभूत मुख्य अतिथि प्रो. हरेराम त्रिपाठी कुलपति संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी ने कहा कि हमारी वैदिक संस्कृति जिस रचनात्मकता उद्यमशीलता का प्रतिपादन करती है, उसका जन्म स्थल कुटीर शब्द में समाहित है। जो इस संस्थान में प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर है। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. आरएम त्रिपाठी, डॉ. राकेश यादव, पी आरओ लक्ष्मी मौर्य, संस्कृत विश्वविद्यालय के पीआरओ शशिन्द्र मिश्र, मंगला प्रसाद सिंह, ललिता सिंह आदि उपस्थित रहीं।