पितृपक्ष के आखिरी दिन बुधवार को लोगों ने नदी और जलाशयों के किनारे पहुंचकर पिंडदान व तर्पण कर अपने पितरों को विदाई दी। कई स्थानों पर लोगों ने ब्राह्मणों को भोजन कराया और उन्हें यथाशक्ति दान-दक्षिणा भी दी।
गोमती तट के हनुमान घाट सहित प्रमुख घाटों पर सुबह से ही लोग पहुंचने लगे थे। क्षौर कर्म के बाद भीगे कपड़े में धार्मिक और पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न कराकर पितरों से आशीर्वाद लेते हुए उन्हें विदाई दी। यह दौर दोपहर ढाई बजे तक चला। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस पर्व पर लोग परंपरानुसार जलाशय के किनारे तथा सार्वजनिक स्थान पर एकत्र हुए। वहां कर्मकांडी ब्राह्मणों से पिंडदान कराया गया। इसके बाद घरों में विविध व्यंजन को गो-माता और कौओं को भी खिलाया।