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मुठभेड़ की खबर लगते ही जिला अस्पताल में पुलिस का पहरा

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जौनपुर। सिंगरामऊ में मुठभेड़ की खबर से मंगलवार की सुबह हड़कंप मच गया। आनन-फानन में शहर के आसपास सहित कई थानों के थानाध्यक्ष और बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को जिला अस्पताल में तैनात कर दिया गया। सुबह आठ बजे तक जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को पूरे तरह से पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया था। इस दौरान किसी को आने-जाने नहीं दिया जा रहा था। हालांकि मीडिया कर्मियों के गेट पर ही जमे होने के कारण सवा सात बजे से मरीजों से पूछताछ के बाद जाने दिया जा रहा था।
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सुबह पांच बजे हुई मुठभेड़ की खबर लगते ही जिले के सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया। शहर कोतवाली, लाइन बाजार, बक्शा, जफराबाद, महराजगंज सहित कुछ थानों से थानाध्यक्ष और शहर के आसपास की सभी छह चौकी इंचार्ज को पुलिस बल के साथ जिला अस्पताल में सुरक्षा का हवाला देते हुए लगा दिया गया। सुबह छह बजे तक जिला अस्पताल के दोनों गेट बंद करा दिए गए। वहीं, घटना की जानकारी होते ही मीडिया कर्मी जिला अस्पताल पर पहुंच गए, जिन्हें देखते हुए पुरुष जिला अस्पताल का मुख्य गेट खोल दिया गया। लेकिन, यहां कई थानाध्यक्ष और चौकी इंचार्ज के साथ पुलिस बल तैनात कर दिया, जो किसी को अंदर नहीं जाने दे रहे थे। वहीं, महिला अस्पताल के गेट को सुबह आठ बजे तक बंद रखा गया, जबकि दोनों अस्पताल परिसर में भारी फोर्स तैनात कर दी गई। इधर सात बजे से अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को पूछताछ के बाद अंदर जाने दिया जा रहा था। वहीं, आसपास के दुकानदार भी घटना की जानकारी लेने को परेशान रहे। सवा सात बजे के करीब अलग-अलग पुलिस वाहन से दोनों बदमाशों को जिला अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया। इसके बाद एएसपी सिटी डा. संजय कुमार और एसपी अजय साहनी भी अस्पताल पहुंचे। वहीं, मुठभेड़ में घायल बदमाशों के मौके पर ही मारे जानी की खबर आती रही, लेकिन, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। सुबह आठ बजे एसपी अजय साहनी ने मीडिया कर्मियों को घटना की जानकारी दी। वहीं, इमरजेंसी वार्ड में अलग-अलग बेड पर शव पड़े थे, जिसके पास तक मीडिया कर्मियों को नहीं जाने दिया गया।
शाम को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुआ दोनों शवों का पंचनाम
जौनपुर। दोनों शवों को पूरे दिन अस्पताल में ही रखा गया। लेकिन, एसपी अजय साहनी के अलावा कोई भी जिम्मेदार घटना से जुड़ी कोई बात करने को तैयार नहीं था। हालांकि शाम करीब साढ़े चार बजे तहसीलदार मूसाराम को मजिस्ट्रेट बनाकर भेजा गया, जिनकी निगरानी में दोनों बदमाशों के शव का पंचनामा किया गया और फिर उसे पोस्टमार्मटम के लिए भेजा गया।
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