नगर में सुबह और शाम लगने वाले जाम से नगरवासी बेहाल हैं। बेतरतीब खड़े वाहन और सड़क तक फैले अतिक्रमण इसका सबब बन रहे हैं। नतीजतन, धूप और तपिश में लोग जाम झेलने को मजबूर हैं। रही बात प्रशासन की तो जिम्मेदार इससे मुंह मोड़े हैं और नगरवासी परेशान हाल ह ैं।नगर क्षेत्र के अतिव्यस्त इलाके गल्ला मण्डी, श्रीरामपुर मार्ग, जेसीज चौक, कोतवाली चौक, रोडवेज रोजाना जाम की चपेट में रहता है। जाम का प्रमुख कारण जहां जिम्मेदारों की उदासीनता, डग्गामार वाहनों का नगर में प्रवेश है वहीं समस्या के जिम्मेदार व्यापारी व आम नागरिक भी हैं। जौनपुर, आजमगढ़ को जाने वाले प्राइवेट वाहन जेसीज चौक तक पहुंचकर सवारी भरते और जगह-जगह सवारी की चालच में वाहनों को आड़ा-तिरछा खड़ा करके समस्या पैदा करते हैं।
ऐसा ही हाल रोडवेज का है। जहां सुल्तानपुर व खुटहन जाने वाले वाहनों के अलावा रोडवेज की बसें डिपो में न जाकर बाहर खड़ी होती हैं जो जाम का सबब बनती हैं। यहां से गुजरने में प्राइवेट वाहन क्षेत्राधिकारी व एसडीएम आवास के सामने भी वाहन खड़ा करने में जरा भी संकोच नही करते। सबसे खराब हालत तो श्रीरामपुर मार्ग व कोतवाली रोड का है। राजकीय पुरुष चिकित्सालय, रेलवे स्टेशन, रोडवेज को जाने वाले इस मार्ग पर व्यापारियों के माल वाहक सुबह से देर रात तक खड़ें होकर मार्ग अवरुद्ध किए होते हैं।
सभासद शयामजी गुप्त बताते हैं कि थाने की तमाम बैठकों में जाम की समस्या उठाई जाती है लेकिन इसका निदान नही किया जा रहा है। स्वर्ण व्यवसायी रमेशचंद साहू ने बताया कि जाम से गाड़ियों के धुएं से सांस की बीमारियां, प्रेशर हार्न की आवाज से लोगों में चिड़चिड़ापन हो रहा है। नई आबादी रोडवेज निवासी ज्ञानचंद सोनकर ने बताया कि जाम में अधिकारी और पुलिस अफसर भी फंसते हैं लेकिन कोई इंतजाम नही हो रहा है। गुलाम साबिर कहते हैं कि प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या पर गम्भीरता से सोचने और अमल कराने की जरूरत है।