करंजाकला के सिद्दीकपुर में सूखा तालाब।
तापमान बढ़ने से भूगर्भ जलस्तर दिन प्रतिदिन गिर रहा है। जिले के अधिकतर कुओं, तालाबों, और हैंडपंपों का पानी सूख गया है। गोमती, सई, पीली, बसुई और वरुणा नदियों की गोद में रह कर भी जिले की धरती प्यासी है। वैसे भी जिले के 11 विकास खंड डार्क जोन घोषित किए गए हैं। दोबारा जांच हो तो कई और ब्लाक डार्क जोन की चपेट में आ जाएंगे।
शहर के बीचोंबीच सौ एकड़ की ऐतिहासिक झील में होटल और इमारतें खड़ी हो गई हैं। झील का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। गांवों में 20 हजार तालाब हैं। इसके अलावा दो दर्जन से अधिक नहरें हैं। तकरीबन 15 हजार कुएं हैं। सब के सब सूख गए हैं।
कुओं को कहीं बोरिंग कर पाट दिया गया है तो तालाबों में सुंदरीकरण के नाम पर खेल हो रहा है। सूखे की मार से किसान तबाह हो रहे हैं। साहूकारों के रूप में एक नए शोषण तंत्र ने किसानों को जकड़ लिया है। कई किसानों ने तो बेटी की शादी के लिए भूमि भी गिरवी रख दी है।
उधर कुआं, हैंडपंप और तालाबों के सूखने से पानी का संकट पैदा हो गया है। किसानों की पैदावार घट गई है और पशु इस गर्मी में पानी के लिए तरस जा रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो 1995 में जिले में 3269 कुएं थे। 2015 में कुएं को संख्या सिमटकर 351 रह गई है। यानी 20 सालों में 2918 कुओं का वजूद समाप्त हो गया ।