इस मामले में घनश्याम सरोज भी दबोचा गया है। मीरपुर बेलवा के ग्रामीणों के मुताबिक आरोपी अभिषेक कुमार पिछले पांच साल से यह काम कर रहा था। इससे आसपास के तमाम युवाओं को जोड़ा गया था।
अभिषेक के गुर्गे यहां नीले ड्रम को वाहन से लाते थे। पूछने पर बताते थे कि मछली का चारा है, ग्रामीणों को शक था कि ये कुछ गलत कर रहे हैं। अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद लोगों का शक यकीन में बदल गया।
जब से दाऊद गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है। तब से ग्रामीण आपस में यह चर्चा कर रहे हैं कि वे गांव में गोरखधंधा करते रहे किसी को पता नहीं चला। आश्चर्य की बात है कि जिला प्रशासन को कैस भनक नहीं लगा।
इस मामले में मीरपुर के प्रधान तिलकधारी सिंह ने बताया कि अभिषेक सिंह मीरपुर का रहने वाला है। इनका परिवार पिछले 10 साल से मुंबई में रहता है। उसके पिता मुंबई में ट्रक चलाते हैं।
क्या बोले क्राइम इंस्पेक्टर
प्रधान ने सिर्फ 10 वर्ष से बाहर रहने की लिखित जानकारी दी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी अभिषेक का परिवार 20 वर्षों से अधिक समय से मुंबई में रह रहा है। गांव में ड्रग्स फैक्टरी की पुष्टि नहीं हो पा रही है। पता लगाया जा रहा है। आरएस यादव, इंस्पेक्टर, क्राइम