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सुबह-शाम धुंध से 20 फीसदी तक बढ़े सांस के मरीज

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दीपावली पर फोड़े गए पटाखों से अब मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। पटाखों से निकले धुएं के कारण वायुमंडल प्रदूषित हो गया है। स्थिति यह है कि सुबह-शाम वायुमंडल में धुंध दिखाने लगा है। इससे सांस से जुड़े मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। चिकित्सकों के मुताबिक करीब 20 फीसदी तक सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
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दीपावली पर्व पर लोगों ने जमकर पटाखे फोड़े। पटाखों के धुएं और आवाज देर रात तक गूंजती रही। इस आतिशबाजी में पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि जनपद में एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) जांच की व्यवस्था नहीं है। इस कारण यह पता नहीं चल पाता है कि जिले में पटाखों के कारण वातावरण कितना प्रदूषित हुआ है। दो साल पहले शिकायत होने पर केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की तरफ से शहर के दो इलाकों में जांच की गई थी। इसके बाद से अब तक इस दिशा में कोई भी कार्य नहीं किया गया है।
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जलता कूड़ा भी है प्रदूषण का कारण
जौनपुर। सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में सामान्य दिनों में 97 टन कचरा निकलता था, लेकिन दीपावली पर्व के कारण तीन गुना कूड़ा निकल रहा है। जिसकी सफाई के लिए कुल 547 सफाई कर्मचारी तैनात हैं। सुबह, दोपहर और शाम को कूड़े के उठान का रोस्टर बनाया है। यह रोस्टर 15 नवंबर तक जारी रहेगा। ताकि शहर में गंदगी का अंबार नहीं रहे। लेकिन, ऐसा देखने को मिल नहीं रहा है, क्योंकि लोगों के घरों से निकला कूड़ा दिन भर सड़कों के किनारे पड़ा रहता है। तारापुर कालोनी मोड़ सहित कुछ स्थानों पर कूड़ा जलना आम बात हो गई है। कूड़ा जलने के कारण भी पर्यावरण प्रदूषण बढ़ा है।
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दीपावली की शाम ही पटाखे छोड़ने से हवा में काफी मात्रा में कार्बन डाई आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड जैसे विषैली गैसों की मात्रा बढ़ गई थी। इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ गया। इस समय हवा की गति तीन से चार किमी प्रति घंटे है। यदि यही गति 10 से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ जाए तो राहत मिल सकेगी। हालांकि अभी यह स्थिति चार-पांच दिनों तक रह सकती है। - पंकज जायसवाल, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, बक्शा।
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जिस तरह से दीपावली पर्व पर पटाखे फोड़े गए हैं, उसका ही असर वातावरण में देखने को मिल रहा है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पटाखों से न सिर्फ ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, बल्कि वन्य जीव जंतुओं व वनस्पति को भी नुकसान पहुंचता है। पर्यावरण के साथ ही पटाखों का मानव स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि हृदय रोगियों, अस्थमा या सांस की बीमारी से पीड़ितों की संख्या 15 से 20 फीसद तक बढ़ गई है। - डा. अरुण कुमार मिश्रा, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ।
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आद्रता की अधिकता के कारण वायुमंडल में दबाव बढ़ जाता है। जिससे धूल व धुआं आदि वायुमंडल में अधिक ऊंचाई तक नहीं जा पाते। ऐसे में पटाखों से निकलने वाला हानिकारक धुआं, मिट्टी आदि मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होते हैं। सबसे अधिक समस्या हृदय रोगियों, सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के अलावा आंखों में जलन, एलर्जी आदि की शिकायत भी हो सकती है। इससे 20 फीसदी तक सांस के मरीज बढ़ गए हैं। 6 हृदय रोगी इस समय उनके अस्पताल में भर्ती हैं। - डा. एचडी सिंह, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ।
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