शहर में हरित आवरण बढ़ने, विशेष रूप से पेड़ पौधों के साथ उचित यातायात और सड़क प्रबंधन से वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से हुए शोध के अनुसार कचरे और बायोमास को जलाना, शहर में लगने वाला जाम, शहर में चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों की मरम्मत और खोदाई को पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार पाया गया।
हरियाली ढूंढते रह जाओगे
शहर पूरी तरह से कंक्रीट का जंगल बन चुका है। कई मोहल्ले में जल चढ़ाने के लिए नीम और पीपल के पेड़ तक नहीं बचे हैं। सड़क किनारे कहीं छांव के लिए भी पेड़ नहीं हैं। जहां थोड़ी बहुत हरियाली है, वहां भी पेड़ों को सुखाकर बिल्डिंग तानने की तैयारी है। वीडीए के ग्रीन बेल्ट में भी धड़ाधड़ निर्माण हो रहे हैं। जब पेड़ ही नहीं हैं तो भला हवा से जहर कैसे कम होगा।