सिकरारा। पावन धाम अजोशी महावीर का इतिहास काफी पुराना है। मान्यता है कि यहां आकर श्रद्धापूर्वक मत्था टेकने वालों की की मन्नत पूरी होती है।
सिकरारा क्षेत्र के दक्षिण-पूर्व सीमा पर बसे अजोशी गांव स्थित धाम महावीर धाम में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यहां साल में दो बार विशेष अनुष्ठान और कड़ाही पूजन समारोह होता है। नाग पंचमी के बाद वाले पहले मंगलवार को बुढ़वा मंगल व बसंत पंचमी के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को शक्ति पर्व मनाया जाता है। शक्ति पर्व अबकी 23 जनवरी को मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां अंतिम चरण में है।
अजोशी धाम के प्रधान सेवक पंडित गोरख नाथ मिश्र ने कि जहां पर इस समय भव्य मंदिर है। वहां कभी घनघोर जंगल था । भर राजाओं पर पूर्ण विजय प्राप्त करने निकले चंदेल अपनी टुकड़ी के साथ उंचनी जा रहे थे। इस स्थान पर पहुंचने पर उनका रथ रुक गया। लाख प्रयास के बाद भी घोड़े आगे नहीं बढ़े तो उनके पुरोहित ने विचार करके बताया कि यहां कोई अदृश्य शक्ति है। पुरोहित की आज्ञा से उस जगह पर खुदाई की गई तो प्रतिमा मिली। राजा आझू राय ने पूजन-अर्चन किया और मंदिर बनवाकर प्रतिमा स्थापना की। बजरंग बली की कृपा से उन्हें जीत मिली। लौटने पर उन्होंने अनुष्ठान व भंडारे का आयोजन कराया। तभी से यहां विधिवत पूजन अर्चन होने लगा। प्रतिमा में हृदय के पास एक छोटा सा निशान है। यह निशान त्रेता में पवन पुत्र हनुमान धवलागिरि पर्वत को लेकर अयोध्या के ऊपर से लंकापुरी जाने लगे। भरत द्वारा दूब के बाण से हनुमान पर बाण छोड़ दिया। बाण लगते ही हनुमानजी पृथ्वी पर गिर कर हे राम का जाप करते हुए मूर्छित हो गए थे। यह स्थान अजोशी धाम है। प्रतिमा में हृदय के पास जो छोटा सा निशान है। वह भरत द्वारा छोड़े गए बाण का ही निशान है।