आटा। आजादी के सात दशक बीतने के बाद आज भी विधानसभा कालपी के कई गांव सड़क, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इन्हीं में से एक है इमिलिया-अकोढ़ी रोड। इस सड़क 28 सौ मीटर हिस्सा दशकों से लोगों के लिए परेशानी सबब बना हैं। आलम यह है कि सड़क खराब होने की वजह से युवाओं के लिए रिश्ते तक लोग लाने के कतराते हैं। किसी के यहां निधन हो जाने पर भी लोग अक्सर इधर से गुजरने से बचते हैं।
यहां के वोटरों का कहना है कि नेता तब आते है जब चुनाव आता है। नेता वादे करते है और चुनाव जीतने के बाद भूल जाते है। 15 गांवों को जोड़ने वाली अकोड़ी से इमिलिया तक सड़क में कीचड़ है। पिछली बार विधानसभा चुनाव में इमिलिया गांव के लोगों ने खराब सड़क के चलते चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया और गांव के बाहर एक बैनर लगा दिया था। वर्तमान विधायक मौके पर गए और गांव के लोगों भरोसा दिलाया कि जैसे ही हम चुनाव जीतते हैं पहला काम इस सड़क को बनवाना होगा। मगर जनता के भरोसे पर खरे नहीं उतरे। 17 साल पहले अकोढ़ी से परासन नहर तक लोक निर्माण विभाग ने सड़क का निर्माण कराया था। इस काम में भी लोक निर्माण विभाग ने इमिलिया गांव तक करीब 2800 मीटर सड़क नही बनवाई। लड़की वाले रिश्ते लेकर आते तो हैं पर आधे रास्ते से ही लौट जाते हैं।
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कई गांवों में पानी की टंकी तक नहीं
इमिलिया बुजुर्ग, बारा, और कुसमरा समेत क्षेत्र के कई गांव आज भी ऐसे हैं जहां आज तक पानी की टंकी नहीं बनी है। इससे वहां की महिलाओं को आज भी कुआं व हैंडपंपों के सहारे रहना पड़ता है।
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फोटो 16::: रामू अवस्थी।
लौट रहे बेटे के रिश्ते
बारा गांव के निवासी रामू अवस्थी ने बताया कि बेटे की शादी के लिए कई लड़की वाले उसको देखने आए। घर परिवार सब कुछ अच्छा लगा मगर सड़क-पानी की समस्या देख लौट गए।
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फोटो 17::::लालाराम पाल।
एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती
बारा गांव के निवासी लालाराम पाल का कहना है कि जब गांव में कोई घटना या कोई महिला गर्भवती हो उसे उरई अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस वालों को फोन करो तो वह सड़क खराब होने पर मना कर देते है। तो हम लोगों को निजी वाहन से उरई अस्पताल जाने के लिए 20 किलोमीटर का चक्कर लगाकर अस्पताल पहुंचना पड़ता है।