कदौरा। ब्लाक क्षेत्र में गोशालाएं होने के बाद भी अन्ना मवेशी अक्सर किसी न किसी किसान की फसल रौंद रहे हैं। जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। अधिकारियों का दावा है कि गोशालाओं की कमी नहीं है। सिर्फ उसमें क्षमता से अधिक मवेशी पहुंच रहे हैं। जिसके पीछ पशुपालकों की मनमानी बड़ा कारण है। मवेशियों को चारा न देना पड़ा। इसलिए कई पशुपालक भी अपने मवेशी इन गोशालाओं में छोड़ जाते हैं। जिससे ही स्थिति बिगड़ जाती है।
क्षेत्र के सबसे अन्ना मवेशी प्रभावित गांवों की गोशालाओं को देखे तो ग्राम बागी स्थित गोशाला में 200 मवेशियों की क्षमता है। पर 350 से भी अधिक मवेशी रखे जा रहे हैं। उदनपुर में 60 की क्षमता है 150 मवेशी हैं। परौसा में 100 की जगह 220 मवेशी हैं। बवीना में 90 की जगह 250 मवेशी, मरगायां में 150 के सापेक्ष 330 से अधिक मवेशी है।
ग्राम पंचायत अधिकारी जगत नारायण ने बताया कि बजट क्षमता के अनुसार मिलता है। पशुपालक अपने मवेशियों को जबरन गोशालाओं में बंद कर देते हैं। विरोध करने पर विवाद करते हैं। पशुचिकित्साधिकारी नीरज सचान ने बताया कि अधिकांश गोाशालाओं में मवेशियों की संख्या दोगुनी है । ब्लाक क्षेत्र में करीब 5700 सौ मवेशी टैगिंग वाले हैं। जबकि 8000 अन्ना मवेशी होंगे।
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फोटो-16 अजय पाल।
कैसे चलेगा परिवार का खर्च
चंदरसी गांव के किसान अजय पाल का कहना है कि उनके पास 8 बीघा खेती थी, जिसमे उन्होंने मटर, चने की फसल बोई थी। हाल ही में मवेशियों ने रौंद कर पूरी फसल खराब कर दी। अब परिवार का खर्च कैसे चलेगा, समझ नहीं आ रहा है।
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फोटो-17 भरत।
कैसे की थी खेती, कलेजा ही जानता है
बडागांव के किसान भरत सिंह का कहना है कि बीते सप्ताह ही अन्ना मवेशी उनकी 10 बीघा मटर की फसल को चर व रौंद कर खराब कर गए थे। इतनी महंगाई में कैसे खेती की थी कलेजा ही जानता है। अब कौन करेगा नुकसान की भरपाई।
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हाल ही में किसानों की फसलों का हुआ नुकसान
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- 10 नवंबर ग्राम लमसर में अन्ना मवेशियों ने 11 बीघा फसल रौंदी
- 18 नवंबर को ग्राम बड़ागांव में मवेशियों ने 10 बीघा फसल रौंदी
- 5 दिसंबर को ग्राम पंडौरा में 20 बीघा फसल खराब हुई
-9 दिसंबर को ग्राम चंदरसी में मवेशियों ने 39 बीघा फसल रौंद डाली
- 27 नवंबर आटा के परासन गांव में मवेशियों ने 20 बीघा फसल रौंदी
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गौशाला संचालन के लिए प्रधान सचिवों को दिए निर्देश
जालौन। गौशालाओं में ना सिर्फ जानवरों को बंद रखा जाए। बल्कि यह भी ध्यान दिया जाए कि ठंड के चलते गौशाला में किसी गोवंश की मृत्यु न हो। किसी भी प्रकार की हीलाहवाली मिलने पर कार्रवाई होना तय है। जो पशुपालक अपने जानवरों को खुला छोड़ देते हैं उनकी लिस्ट दी जाए ताकि ऐसे पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। यह बात बीडीओ ने सचिव व प्रधानों को निर्देश देते हुए शुक्रवार को जालौन ब्लाक सभागार में कही।
उन्होंने बताया कि ब्लाक क्षेत्र की 62 ग्राम पंचायतों में 38 गौशालाओं का संचालन हो रहा है। जिसमें 37 अस्थायी गौशलाएं है एवं हरीपुरा में स्थायी गोशाला बनाई गई है। उन्होंने प्रधान व सचिवों को बताया कि उन्हें शिकायत मिल रही है कि गौशालाओं के संचालन में लापरवाही बरती जा रही है, यह उचित नहीं है। गौशालाओं के संचालन के लिए शासन से धन भी आ गया है। यदि किसी प्रधान को धन प्राप्त नहीं हुआ है तो वह डिमांड करें उसे धन उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में गा्रम प्रधान व सचिव मौजूद रहें। (संवाद)