उत्तर प्रदेश के उरई में पांच वर्ष पूर्व घर में अकेली महिला के साथ युवक ने तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी देते हुए दुष्कर्म किया था। महिला के पति की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जिसकी सुनवाई (एफटीसी) पॉक्सो न्यायालय में चल रही थी।
साक्ष्यों के आधार पर आरोपी पर दोष हो जाने पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश गुलाम मुस्तफा ने दस वर्ष का कारावास व दस हजार जुर्माने की सजा सुनाई। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी लखनलाल निरंजन ने बताया कि डकोर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में बीती 9 दिसंबर 2015 को महिला घर में अकेली थी इसी दौरान सुशील कुमार घर में आ धमका।
तमंचा दिखाकर उसने महिला को जान से मारने की धमकी देते हुए दुष्कर्म किया। पीड़िता के शोर मचाने पर उसके परिजन मौके पर आ गए तो सुशील धक्का देकर वहां से चला गया। बाद में महिला ने पति के साथ कोतवाली पहुंचकर आरोपी के खिलाफ तहरीर दी।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मजबूत साक्ष्य संकलित कर पुलिस ने उसके विरुद्ध कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले ट्रायल के बाद शनिवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश गुलाम मुस्तफा ने फैसला सुनाते हुए सुशील को 10 साल कारावास की सजा के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अभियोजन की तरफ से मुकदमे की पैरवी शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार गुर्जर ने की।