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महिलाओं का लैंगिक उत्पीडन रोकने को कार्यालयों में गठित हो शिकायत समिति

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उरई। ऐसे कार्यालय जहां दस से अधिक कर्मचारी कार्यरत है, वहां पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन करना अनिवार्य होना चाहिए। ऐसा न करने वाले नियोजकों पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जा सकता है।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. अमरेंद्र कुमार का कहना है कि कार्यस्थल पर महिलाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध छूना या छूने की कोशिश करना जो महिला के सामने असहज स्थिति पैदा करने वाली हो, उसे लैंगिक उत्पीड़न के दायरे में माना जा सकता है। किसी महिला से कार्यस्थल पर अश्लील बातें करना, अश्लील तस्वीरें, फिल्में या अन्य सामग्री दिखाना भी लैंगिक उत्पीड़न के दायरे में आ सकता है। उन्होंने बताया कि जनपद के समस्त कार्यालयों में नियमानुसार गठित समिति द्वारा प्राप्त प्रकरणों की सूचना डीएम कार्यालय को दी जानी चाहिए। ऐसी शिकायतें घटना के 90 दिनों के भीतर की जा सकती है। या राष्ट्रीय व राज्य महिला आयोग के अधिकारी शिकायत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिले में 35 कार्यालयों में ऐसी कमेटियां गठित की जा चुकी है। एक शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।
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