कालपी। जिले की तीन सीटों में सबसे महत्वपूर्ण सीट कालपी में बुधवार को सपा मुखिया अखिलेश यादव विरोधियों पर निशाना साधेंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव भी कालपी की जमीन से पार्टी के लिए जनाधार जुटा चुके हैं। हैरत की बात तो यह है कि समाजवादी पार्टी के गठन के बाद से लेकर अब कालपी विधानसभा की सीट एक बार भी सपा के खाते में नहीं गई है। क्षत्रिय बाहुल्य कालपी सीट बसपा, कांग्रेस व भाजपा के ही खाते में जाती रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की विजय यात्रा क्या कालपी में भी पार्टी को 2022 में विजय दिला पाएगी, यही सवाल मंगलवार को सपाइयों में चर्चा का विषय बना रहा।
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुधवार को कालपी में अपनी विजय यात्रा लेकर पहुंच रहे हैं। इसको लेकर कार्यकर्ताओ का उत्साह चरम पर है। इस सियासी जोश को जीत में में बदलने की चुनौती भी सपा के सामने है। मालूम हो कि 4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी का गठन किया गया था। तब से समाजवादी पार्टी ने कालपी विधान सभा सीट पर कई प्रयोग किए। पर एक बार भी सीट सपा के खाते में नहीं आ सकी। चुनाव निशान साइकिल से कोई भी नेता सीट का विधायक नहीं बन सका है। यह पहला मौका है, जब 2022 के चुनाव सिर पर हैं और सपा के राषट्रीय अध्यक्ष विजय यात्रा के साथ जिले में चुनावी शंखनाद करेंगे। लिहाजा इस बार सपाइयों को पूरी उम्मीद है कि कालपी की जमीन पर सपा की साइकिल को जिताकर रहेंगे। फिलहाल सीट किस पार्टी के खाते में जाएगी यह तो 2022 के परिणाम ही बताएंगे।
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