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सहरी से सिवईं तो इफ्तार से दोस्त हुए दूर

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युसूफ अंसारी - फोटो : ORAI
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सहरी से सिवईं तो इफ्तार से दोस्त हुए दूर
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फोटो-7 सिरसाकलार में घरों में नमाज पढ़ते बच्चे।
सवाद न्यूज एजेंसी
उरई/एट। यह पहला मौका है जब रमजान माह की शुरुआत खामोशी के बीच हुई। पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। बीमारी से बचाने के लिए पूरा देश लॉकडाउन है। जिस कारण न तो मस्जिदों में नमाज के लिए भीड़ ही लग रही है और न ही इफ्तार की दावतें ही नजर आ रही हैं। यह बात और है कि बंद कुछ भी नहीं हुआ है, फर्क सिर्फ इतना आया है कि नमाज घरों में की जा रही है और लजीज पकवानों की जगह साधारण फलों से ही सहरी और इफ्तार की जा रही है। रोजेदारों का कहना है कि इतना सब कुछ होने के बाद उन्हें भरोसा है कि देश से कोरोना का खात्मा भी होना तय है। भले ही आज सहरी के वक्त प्याले से सिवईं और इफ्तार की दावत में अपने न दिखाई देते हो पर अपनों की सलामती के लिए यदि कुछ समय के लिए सामाजिक दूरी का पालन भी करना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे। इस बार स्कूल कालेज बंद होने के कारण बच्चे भी घरों में नमाज पढ़ते नजर आ रहे हैं।
परिवार के साथ पांचों वक्त की नमाज
एट के रोजेदार शान मोहम्मद मंसूरी का कहना है कि उनके जीवन का यह पहला रमजान ऐसा है, जब वे मस्जिद में नमाज पढ़ने नहीं जा रहे हैं। ऐसे में पूरे परिवार के साथ ही पांचों वक्त की नमाज पढ़ी जा रही है। नमाज में भी मुल्क की तरक्की के साथ-साथ इस बीमारी से दुनिया को बचाने के लिए दुआ की जा रही है।
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घर पर बने पकवानों से खोल रहे रोजे
एट के ही रोजेदार हाजी वाहिद बोले कि अभी तक रोजे खोलते वक्त खजूर के अलावा विभिन्न तरह के पकवान प्लेट पर सजते थे, पर इस साल हालात अलग हैं। प्लेट में ज्यादातर घर पर बने पकवान ही दिखाई देते हैं। बाजारें न खुलने से खजूर की कमी अखर रही है। फिर भी मामला सभी की सलामती का है तो यह भी चलेगा।
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इस बार इफ्तार की दावतें भी नहीं
उरई के समाजसेवी यूसुफ अंसारी का कहना है कि हर साल रमजान के मौके पर अपने यहां इफ्तार की दावत किया करते थे, जिसमें सभी साथी आते थे और एक साथ बैठकर सभी इफ्तार की दावत का लुत्फ उठाते थे। इस बार सामाजिक दूरी की वजह से अफ्तार दावतों से दूरी बनी है। घर पर ही परिवार के साथ दूर-दूर बैठकर इफ्तार की जा रही है।

सिरसा कलार में घर में नमाज पढ़ते बच्चे- फोटो : ORAI

शान मोहम्मद- फोटो : ORAI

हाजी वाहिद अली- फोटो : ORAI

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