उरई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव के जिले में गुपचुप दौरे के बाद बुधवार को पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कालपी में विजय यात्रा के माध्यम से जिले की सियासत को गर्मी के बीच चुनावी फुहारें छोड़ दी। इसके बाद अब दूसरे दलों ने कमर कस ली है। इनमें फिलहाल कांग्रेस और प्रसपा दलों के नाम शामिल है। जिनके बड़े नेताओं के इसी माह जिले की कालपी विधान सभा में ही आने की अटकलें तेज हो गई है।
बता दें कि बुधवार को यात्रा लेकर कालपी पहुंचे अखिलेश यादव पूरी तरह से चुनावी मोड़ पर दिखाई दिए। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, अन्ना मवेशी व लखीमपुर खीरी आदि के मुद्दे छेड़कर केंद्र व प्रदेश दोनों ही भाजपा सरकारों पर निशाना साधा। लिहाजा दूसरे दलों को लगने लगा है कि यदि देर की तो वोट हाथ से खिसक सकते हैं। इसलिए अखिलेश की सभा निपटते ही कांग्रेस और प्रसपा की सभाओं की चर्चाएं भी तेज हो गई है।
कांग्रेस पार्टी के सूत्रों के अनुसार इसी माह 26 से 28 के बीच किसी भी दिन पार्टी की प्रदेश प्रभारी प्रियंका वाड्रा का कार्यक्रम कालपी अथवा उरई विधानसभा सीट पर तय हो सकता है। इसी तरह प्रसपा के दिग्गज नेताओं के अनुसार भतीजे अखिलेश के बाद प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव भी अपनी सामाजिक परिवर्तन यात्रा लेकर 18 अक्तूबर को कालपी पहुंच सकते हैं। कुल मिलाकर बसपा के प्रबुद्ध सम्मेलन से शुरू हुआ चुनावी घमासान जिसे में अब चरम पर है।
भाजपा ने भी भेजी हाईकमान को सभा की रिपोर्ट
भाजपा पार्टी के सूत्रों के अनुसार पूर्व सीएम अखिलेश की यात्रा और सभा की पूरी रिपोर्ट हाईकमान को भेजी गई है। कहां पर स्वागत कम और कहां अधिक हुआ। इसकी भी जानकारी से लखनऊ के नेताओं को अवगत कराया गया है।
अखिलेश ने नहीं लिया बसपा, कांग्रेस का नाम
पूर्व सीएम अखिलेश यादव का पूरा संबोधन भाजपा पर ही केंद्रित रहा। उन्होंने एक बार भी बसपा या फिर कांग्रेस दलों का नाम नहीं लिया। इसके पीछे दोनों ही दलों से एक एक मर्तबा रहे सपा के गठबंधन को भी जोड़कर देखा जा रहा है।