उरई। महिलाएं स्वयं संकल्प लें कि वह कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ आवाज उठाएंगी एवं लिंग परीक्षण का विरोध करेंगी। तभी इस गंभीर समस्या से निजात मिल सकती है। गर्भपात के लिए यदि कोई पुरुष महिला पर दबाव बनाता है तो उसके लिए कानून है। उक्त विचार गांधी महाविद्यालय में मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत कन्या भ्रूण हत्या निवारण विषय पर आयोजित वेबिनार में पूर्व प्राचार्या डॉ अलका नायक ने मुख्य वक्ता के यह विचार व्यक्त किए।
डॉ ऋचा पटैरिया के संयोजकत्व में आयोजित वेबिनार में उन्होंने आगे कहा कि गर्भ में आए बच्चे को सुरक्षित रखने का दायित्व दंपती का होता है। हमें बिना लिंग परीक्षण के उन्हें स्वीकार करना चाहिए। डॉ राकेश नारायण द्विवेदी ने कहा कि हमारे समाज में भ्रूण हत्या परिवार नियोजन के कारण भी होती है। महंगाई को देखते हुए भी लोग एक या दो से अधिक बच्चों को स्वीकार नहीं करते हैं। अभियान के संयोजक तथा हिंदी विभाग के डॉ कुमारेंद्र सिंह सेंगर ने आंकड़ों सहित कहा कि सभी इस कुकृत्य को रोकने के लिए आगे आए। डॉ ऋचा सिंह राठौर ने कहा कि बेटा और बेटी दोनों ही प्रकृति के संतुलन के लिए आवश्यक हैं। वेबिनार में डॉ सुनीता गुप्ता, रीतेश कुमार, प्राचार्य डॉ अजय कुमार सक्सेना, डॉ शिवकुमार पटेल, डॉ गोविंद सुमन आदि मौजूद रहे।