अनियंत्रित होकर पलटे डंपर के क्लीनर असलम और चालक फिरोज की दोस्ती भी काफी पुरानी थी। डंपर पलटने के बाद फिरोज चाहता तो उससे दूर खड़ा हो सकता था लेकिन वह असलम को बार बार दिलासा देते हुए उसे बचाने में जुट गया, क्या पता था कि कुछ पलों बाद तीसरा डंपर उसकी मौत बनकर उसे हमेशा के लिए दुनिया से अलविदा करा देगा।
एट के सोमई निवासी सुशील को क्या पता था जिस डंपर को वह अपनी रोजी रोटी मानता है, वहीं डंपर एक दिन उसकी चिता बन जाएगा। लपटों से घिरा सुशील डंपर में फंसकर चीखता चिल्लाता रहा लेकिन आग इतनी भयावह थी कि कोई पास जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। आखिर में पहले सुशील की चीखें शांत हुई और इसके बाद डंपर की लपटे ठंडी पड़ी।