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बीमा योजना किसानों की, मुनाफा कंपनी का

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लला राजपूत - फोटो : ORAI
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उरई। कहने को तो किसानों को फसली नुकसान से बचाने व फायदा पहुंचाने के लिए फसल बीमा योजना शुरू की गई थी, लेकिन पिछले कई सालों से इस योजना से सिर्फ बीमा कंपनियों को ही मुनाफा हुआ है। किसानों कि स्थिति जस की तस है। जिससे किसानों के हितों के लिए चली योजना उनके लिए मुसीबत से कम नहीं थी। अनिवार्यता की वजह से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। हाल ही में केंद्र सरकार ने बीमा कराने की अनिवार्यता को खत्म कर दी है। जिससे किसानों को राहत महसूस हुई है।
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बता दें कि वर्ष 2016 में किसानों को दैवी आपदा से होने वाले फसल के नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की थी। इस योजना में सभी किसानों को बीमा कराना अनिवार्य होता था। योजना में कृषकों के अंश के साथ साथ केंद्र व राज्य सरकार भी प्रीमियम में अंशदान करती थी। जिससे कंपनियों के पास मोटी रकम पहुंचती थी। पिछले कई वर्षों के आंकड़े देखने पर पता चलता है कि किसानों के हित के लिए शुरू की गई योजना से सिर्फ बीमा कंपनियों का ही हित हुआ है। किसानों ने तो प्रीमियम जमा करने के बाद क्लेम के लिए सिर्फ चक्कर ही लगाए हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016-17 में जिले से कुल 22 करोड़ 73 लाख रुपये का प्रीमियम कंपनी के खाते में जमा हुआ था, जबकि इस वर्ष कंपनी ने महज 236 किसानों को मात्र 24 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। जबकि 2017-18 में जिले से कुल 55 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा किया गया, जबकि इसके एवज में कंपनी ने सिर्फ 16 लाख रुपये का ही क्लेम कंपनी को दिया। यही हाल वर्ष 2018-19 का रहा यहां भी कंपनी के क्लेम व प्रीमियम का अंतर कई गुने तक रहा।
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इस वर्ष जिले से कुल प्रीमियत 29 करोड़ रुपये जमा हुआ जबकि इसके क्लेम महज 20 लाख दिया गया। पिछले पांच सालों में किसान बीमा योजना से किसानों की जगह कंपनी की मोटी कमाई हुई है। किसान लला राजपूत का कहना है कि क्रेडिट कार्ड के नाम पर भी बैंक किसानों से प्रीमियम काट लेते थी, जरूरत मंद किसान मजबूरी में क्रेडिट कार्ड लेता था। इसका फायदा उठाते हुए बैंक अधिकारी मनमानी करते थे। किसान काशीराम का कहना है कि सबसे ज्यादा नुकसान अन्ना से होता था, इस पर तो क्लेम मिलता नहीं था। इसके बाद भी अन्य दैवी आपदा के क्लेम के लिए भी किसानों को महीनों काम छोड़ बैंक व कृषि अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
इन हालात में मिलेगा फसल बीमा का लाभ
- फसल को दैवी आपदा जैसे सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि आदि। फसल की बुआई न कर पाने या फिर बुआई असफल होने पर। फसलों की रोग आदि लगने की स्थिति में फसल को क्षति होने पर। फसल की कटाई के बाद 14 दिन में खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को बेमौसम बारिश ओलावृष्टि में नष्ट हो जाने पर।
अन्ना मवेशियों व बिजली से आग पर नहीं मिलता था क्लेम
जिले में किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी व नुकसान अन्ना जानवरों से होने वाले नुकसान व खेतों की ऊपर से निकले जर्जर तारों से होती है, लेकिन दोनों परिस्थितियों को फसल बीमा क्लेम से बाहर रखा गया था, जिससे किसानों को प्रीमियम जमा करने के साथ भी नुकसान भी उठाना पड़ता था। अब बीमा कराने की अनिर्वायता खत्म करने से कम से कम किसानों का प्रीमियम का पैसा तो बचेगा। कृषि निर्देशक ने आरके तिवारी ने बताया कि इन दोनों समस्याओं को क्लेम में नहीं शामिल किया गया था, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
अनिवार्यता खत्म होने से अफसर भी राहत में
फसल बीमा की अनिर्वायता होने से सभी किसानों को शत प्रतिशत बीमित कराने के उद्देश्य से रबी व खरीफ की सीजन में कृषि विभाग के अधिकारी कई महत्वपूर्ण कार्यों को छोड़ कर किसानों को बीमा कराने में परेशान नजर आते थे, इसकी अनिवार्यता खत्म होने से किसानों के साथ साथ अधिकारियों को भी राहत मिली।

काशीराम- फोटो : ORAI

मुहम्मदाबाद में खेत में काम करते किसान। - फोटो : ORAI

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