उरई। कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने में फिर एक बार स्टाफ की कमी रोड़ा बन सकती है। यदि इस लहर ने बच्चों को घेरा तो स्थितियां संभालना मुश्किल हो जाएगा। जिले में सिर्फ चार ही बाल रोग विशेषज्ञ होने से स्वास्थ्य महकमा चिंतित है।
कोरोना से निपटने के लिए मेडिकल कालेज में 400 बेड तैयार हैं। इसके अलावा 80 बेड का अस्पताल उरई क्लब में बनेगा। 100 बेड मेडिकल कालेज के शेल्टर होम में तैयार होंगे। मेडिकल कॉलेज में भी 20 बेड का पीडियाट्रिक केयर यूनिट (पीकू) वार्ड बनाया गया है। इसी तरह बीस बेड का जिला अस्पताल में भी पीकू वार्ड तैयार है। पर डाक्टरों की कमी है। जिला अस्पताल में फिजीशियन, चेस्ट फिजीशियन आदि के कई पद खाली पड़े हैं। इसकी वजह से संक्रमण बढ़ने पर समस्या बढ़ने की संभावना है। इसी तरह बाल रोग विशेषज्ञ की भी कमी है। जिला स्तर पर सीएचसी स्तर सिर्फ दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। शेष सभी सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञों नहीं हैं।
जिला अस्पताल में भी फिलहाल दो डॉक्टर हैं। पर इनकी ड्यूटी कोविड मरीजों के लिए लगाई जाती है तो सामान्य मरीजों को संभालना मुश्किल हो जाएगा। प्रशासन ने व्यवस्था तो खड़ी कर दी है पर संचालन करने के लिए संसाधन नहीं है। ऐसे में संक्रमण फैलने पर क्या होगा, यह बड़ी बात होगी।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अविनेश कुमार ने बताया कि स्टाफ की कमी को लेकर पत्राचार किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द कुछ डॉक्टर और फार्मासिस्ट मिलेंगे।
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फोटो-23-पीएचसी प्रभारी से जानकारी लेते कालपी विधायक। संवाद
विधायक ने पीएचसी में मरीजों से पूछा हाल
कुठौंद। पीएचसी कुठौंद का कालपी विधायक नरेंद्र पाल सिंह जादौन ने औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों से हालचाल लेकर सुविधाओं के बारे में जाना। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ अरुण तिवारी ने बताया कि र्दी से बचाव के लिए अस्पताल परिसर में अलाव की व्यवस्था की गई है। सरकारी स्तर से अभी नगर में कहीं अलाव नहीं जलाए गए हैं। इस दौरान डॉ सुरेंद्र सिंह राजावत, रामप्रकाश निषाद, गौतम त्रिपाठी, पवन शर्मा आदि मौजूद रहे। (संवाद)