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गाजे बाजे के साथ निकली गणपति की शोभायात्राए, जलाशयों में हुआ विसर्जन

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कोंच। सप्ताह भर चले गणपति महोत्सव का शुक्रवार को गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही समापन हो गया। प्रशासन द्वारा डीजे की अनुमति न देने के कारण बैंड बाजों और ढोलों की धुनों पर युवाओं को थिरकना पड़ा। युवाओं ने जमकर गुलाल भी उड़ाया। नगर की 36 गणपति प्रतिमाओं को धनुताल और नहर में विसर्जित किया गया।
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सुबह से ही प्रतिमाओं की आरती के बाद उनके विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया था जो दोपहर तक जारी रहा। प्राचीन गढ़ी पर विराजमान गणपति प्रतिमा के विमान के साथ गणेश सेवा समिति के हरिश्चंद्र तिवारी, सभासद अमित यादव, सुशील दूरवार, सतीश राठौर आदि ने धनुताल में बप्पा को नम आंखों से विदाई दी। भुंजरया तिराहे के गणेश, किराना कमेटी के गणेश, सर्राफा कमेटी, रेडीमेड कमेटी, रामगंज बाजार, मोबाइल व्यवसायियों, लवली चौराहा आदि के गणेश भी जलाशयों में विसर्जित किए गए। ग्राम छानी में भी गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। राकेश पाठक के बरामदे में विराजे गणेश का एमएलसी प्रतिनिधि आरपी निरंजन, विधायक मूलचंद्र निरंजनए जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ घनश्याम अनुरागी आदि ने अलग-अलग दिवसों में उपस्थित होकर भगवान की आरती उतारी। इस मौके पर आनंद बाबूजी, कमलेश खटीक, दिनेश, सुंदर परिहार आदि रहे।
जालौन संवाद के अनुसार गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं का नारायणपुरा बंबा में विसर्जन किया गया। गणपति विसर्जन के दौरान हवन, पूजन एवं भंडारे का भी आयोजन किया गया। लोगों ने पूरी श्रृद्धा के साथ अपने-अपने घरों में ही मूर्ति की स्थापना कर गणेश महोत्सव का पर्व मनाया। सात दिवसीय गणेश महोत्सव में संध्या भजन के साथ ही प्रसाद वितरण भी किया गया। मुहल्ला मुरलीमनोहर, मोहल्ला चौधरयाना, गोविंदेश्वर मंदिर परिसर, मोहल्ला पुरानी नझाई, अकोढ़ी दुबे आदि स्थानों पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं को श्रद्धालु शाम के समय नारायणपुरा स्थित बंबा पर लेकर गए। भक्तगण गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारे लगा रहे थे।
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फोटो-29-कोंच में जलविहार के लिए जाते मुरलीमनोहर महाराज। संवाद
श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ जलविहार
कोंच। इस बार धनुताल में विहार लायक पानी न होने के कारण जलविहार का पर्व फीका रहा। भगवान के विभिन्न श्रीविग्रहों ने सांकेतिक तौर पर एक गड्ढे में भरे पानी में अवतरण कर पर्व की रस्म अदायगी की। नदीगांव में कई मंदिरों के श्रीविग्रहों को पहुज नदी में जलावतरण करा कर जलविहार कार्यक्रम मनाया गया।
बता दें कि रामलला सरकार, भगवान नृसिंह और सैरा के रामजानकी महाराज तालाब में घंटों विहार करते हैं जो अबकी दफा पानी नहीं होने के कारण सांकेतिक करना पड़ा। इधर, सुबह से ही जारी रिमझिम बारिश के कारण भी आयोजन की भव्यता प्रभावित रही। धर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित कल्याणराय और बल्दाऊ मंदिरों से भी भगवान जलविहार के लिए धनुताल पहुंचे। अवधबिहारी लाल महाराज, सीतानाथ महाराज, मुरलीमनोहर महाराज आदि मंदिरों में औपचारिकता पूरी की गई। उधर, नदीगांव में ठाकुर जी ने पहुज नदी में जलविहार किया। राधाकांत जू महाराज, राधागोविंद मंदिर आदि के श्रीविग्रहों ने जलविहार किया। इस दौरान गोविंदशरण मिश्रा, ब्रजविहारी गुबरेले, उमाकांत त्रिपाठी, श्रीकांत उदैनिया, माताप्रसाद, चंद्रपाल सेंगर आदि उपस्थित रहे।
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