उरई। तमंचा रखने के मामले में दोष सिद्ध होने पर न्यायाधीश ने चार को दोषी पाते हुए ढाई ढाई साल की सजा सुनाई। दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा एक दोषी को बांका रखने पर छह माह की सजा सुनाई।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला गांधीनगर निवासी भागचंद्र ने कोतवाली पुलिस को आठ मार्च 2012 को तहरीर देकर बताया था कि वह अपने साथी ग्राम जैसारी हरनारायण राजपूत के साथ उसके भाई धर्मदास के पास होली के त्योहार में मिलने आया था। गांव वापस लौटते समय राठ रोड पर एक पेट्रोल पंप के पास पेट्रोल डलवाने लगा तभी कुछ अज्ञात लोगों ने हरनारायण की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने छह अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। वहीं मृतक की पत्नी शांति देवी ने घटना के दो दिन बाद पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसके पति पेट्रोल डलवाकर अपने गांव जा रहे थे। तभी रंजिश मानने वाले जैसारी कला गांव निवासी यज्ञदत्त व उसके बेटे राजेंद्र प्रसाद, हरीसिंह, भानुप्रताप, हमीरपुर जनपद के चिकासी थाना क्षेत्र के बंगरा निवासी प्रहलाद व चिकासी थाना क्षेत्र के चंदवारी निवासी देवकरन ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने दोनों तहरीर के आधार पर हत्या सहित अन्य धाराओं में छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपी जमानत पर चल रहे थे। इस मामले का ट्रायल अपर जिला जज प्रथम शिवकुमार की अदालत में चल रहा था।
शनिवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सभी को दोष मुक्त कर दिया। जबकि तमंचा रखने के मामले में हरीसिंह, भानुप्रताप, राजेंद्र प्रसाद व देवकरन को दोषी पाते हुए ढाई ढाई साल की सजा सुनाई और दस दस हजार रुपये जुर्माना लगाया। जबकि प्रहलाद को बांका रखने का दोषी साबित होने पर छह माह की सजा सुनाई। यज्ञदत्त को बरी कर दिया गया।