एट व पिरौना फीडर से पांच दिन से बिजली सप्लाई बंद है। इसके चलते पांच दिन
से आधा सैकड़ा से अधिक गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। वहीं बिजली
अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि उन्होंने ग्रामीणों के फोन उठाने
की बंद कर दिए। ग्रामीणों को यह भी जानकारी नहीं दी जा रही है कि बिजली
क्यों नहीं आ रही? उधर, पांच दिन से बिजली न आने से
ग्रामीणों का जनजीवन
पटरी से उतर चुका है। एट व पिरौना जैसे बड़े कस्बों की भी बिजली गुल है।
इससे यहां का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। वहीं पानी की जुगाड़ करने के
लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों के प्रति
ग्रामीणों में आक्रोश भी पनपता जा रहा है। ये कभी भी फूट सकता है।
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अक्तूूबर की रात बारिश के दौरान एट फीडर की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। दो
दिन तक जब बिजली नहीं आई तो ग्रामीणों ने जानकारी की। इस पर अधिकारियों ने
जवाब दिया कि लाइन में फाल्ट के कारण सप्लाई बंद की गई है। फाल्ट ढूंढा जा
रहा है। पांच दिन बीत चुके हैं। अभी तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है।
दोनों फीडरों की सप्लाई बंद
होने के कारण जखौली, अंडा, पचोखरा, बिरगुवां
खुर्द, चमारी, जमरोही खुर्द, पिंडारी, बिलायां, कुसमिलिया समेत आधा सैकड़ा
से अधिक गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। हालत ये है कि बिजली न आने से
परेशान ग्रामीण जानकारी के लिए फोन करते हैं और अधिकारी रिसीव नहीं करते।
अधिशासी अभियंता तरनवीर तो शनिवार को अपना सीयूजी नंबर ही बंद किए रहे।
वहीं,
बिजली नहीं आने से चक्की आदि बंद हैं तो पेयजल, मोबाइल चार्जिंग आदि की भी
परेशानी हो गई है। लोगों को पीने के पानी की व्यवस्था करने में काफी
मशक्कत करनी पड़ रही है। दूरस्थ क्षेत्रों से साइकिल व अन्य माध्यमों से
पानी भरकर
लाया जा रहा है। सुबह से ही महिलाएं, बच्चे व पुरुष खाली बर्तन
लेकर पानी के इंतजाम में गांव से बाहर निकलने लगते हैं। यही नहीं, एट व
पिरौना जैसे बड़े कस्बे भी अंधेरे में हैं। यहां पर रोजाना लाखों रुपये का
कारोबार होता है जो बिजली न आने के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ट्यूबवेल भी पड़े बंद, नहीं हो पा रहा पलेवा
बिजली के अभाव में ट्यूबवेल का संचालन न होने से किसानों की सैकड़ों एकड़
भूमि पलेवा से वंचित हो रही है। वहीं, किसान शांतिस्वरूप राठौर, उम्मेद
अली, ज्ञान सिंह राजपूत, अशोक राजपूत, श्याम सुंदर, भारत सिंह अहिरवार आदि
कहना
है कि बीते दिनों हुई बारिश खेतों के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में
रबी की फसल की बुवाई के लिए खेतों में पलेवा करना ही है। इसके लिए किसान
रजबहा या ट्यूबवेल का सहारा लेने की सोच रहे हैं लेकिन बदहाल विद्युत
व्यवस्था के चलते क्षेत्र के ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। इससे खेतों में पलेवा
नहीं हो पा रहा है। पलेवा को लेकर किसान बेहद चिंतित हैं।
तीन दिन से बिजली गुल, पानी के लिए हाहाकार
नगर पंचायत कोटरा में तीन दिनों से बिजली की समस्या है। उरई स्थित 32
केवीए ट्रांसफार्मर में फाल्ट आने से कोटरा की बिजली आपूर्ति बाधित है। तीन
दिन से बिजली न आने से गांव में पानी का संकट हो गया है। लोगों को दूरदराज
से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति
बहाल न की गई तो ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे।
उरई स्थित 32 केवीए
ट्रांसफार्मर से नगर पंचायत कोटरा व इससे जुड़े गांवों को बिजली की आपूर्ति
की जाती है। पिछले दिनों तेज धमाके के साथ ट्रांसफार्मर में फाल्ट आ गया।
इससे नगर पंचायत कोटरा की बिजली आपूर्ति तीन दिन से पूरी तरह बाधित है।
बिजली न आने से पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई है व दैनिक कार्य भी
प्रभावित हैं। वहीं क्षेत्र के
अधिकतर हैंडपंप पहले से ही खराब हैं और खारा
व गंदा पानी दे रहे हैं। इसके चलते लोगों को दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की मानें तो सुबह से ही पानी ढोने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
लोग साइकिलों व बैलगाड़ियों से पानी लाने को मजबूर हैं। जयप्रकाश अग्रवाल,
मानसिंह, राजकुमार, मनीष व्यास, अवधेश कुमार, अरुण कुमार आदि ने बताया कि
कई मर्तबा इस संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक समस्या
का समाधान नहीं निकाला जा सका है।