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पाली हाउस की मदद से सब्जियों की पैदावार बढ़ाए किसान

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उरई। प्रगतिशील किसान नीतू सिंह शनिवार को अमर उजाला के फेसबुक पेज पर लाइव रहीं। इस दौरान जनपद ही नहीं, दूसरे जिलों के किसानों ने उनसे खेती से जुड़े सवाल किए। जवाबों के साथ ही उन्होंने कहा कि पॉली हाउस की मदद से किसान सब्जियों की पैदावार बढ़ा सकते हैं।
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नीतू सिंह ने कहा कि सब्जियां बोने वाले किसान परंपरागत खेती से हटकर पॉली हाउस को अपनाएं। पॉली हाउस में किसी भी मौसम में कोई भी सब्जी उगाई जा सकती है। कम पानी और खाद में सब्जियों की अधिक पैदावार का सबसे बेहतर तरीका पॉली हाउस है। इसके जरिए खेती कर हरियाणा और राजस्थान में कई किसान साल में लाखों की कमाई कर रहे हैं। नीतू ने बताया कि खुले में सब्जी की खेती की अपेक्षा पॉली हाउस में एक एकड़ में पांच गुना अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। कीट पतंगे, मधुमक्खी, ट्ड्डिा आदि से भी पॉली हाउस पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर किसानों को भ्रांति रहती है कि पॉली हाउस में केमिकल का प्रयोग कर सब्जी उगाई जाती है। ऐसा नहीं है। पॉली हाउस में रासायनिक के साथ-साथ जैविक खादों का भी प्रयोग किया जाता है। इसकी पैदावार से सेहत पर खराब प्रभाव नहीं पड़ता है। पॉली हाउस की खेती से किसान के खेत पर कोई दुष्प्रभाव नहीं दिखाई देता है। प्रगतिशील महिला किसान नीतू का ऊमरी नगर पंचायत के गोरा चिरैया गांव में अपना पॉली हाउस है। उन्हें कई मर्तबा सम्मानित किया जा चुका है।
सवाल : क्या फूल गोभी की फसल उगाने के लिए वर्तमान समय सही है। - शीतू चौहान, उरई
जवाब: पॉली हाउस में कभी भी कोई फसल उगा सकते हैं। इसमें फूल गोभी भी शामिल है। बेहतर होगा कि वर्तमान फूल गोभी के बजाय पत्ता गोभी की फसल करें। इससे ज्यादा उत्पादन लिया जा सकता है।
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सवाल: पॉली हाउस में क्या-क्या उगाया जा सकता है। - अमित इतिहास, इटौरा
जवाब: पॉली हाउस में लगभग सभी तरह की सब्जियां जैसे टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, मिर्च के फूलों में जरवेरा और गेंदा, गुलाब आदि की अच्छी खेती की जा सकती है।
सवाल: गर्मी में पॉली हाउस को आंधी से कैसे बचाया जा सकता है।- रघुवीर सिंह राजपूत, राठ (चिल्ली)
जवाब: पॉली हाउस बनाते समय सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसका स्ट्रक्चर ऐसा होता है कि 200 किमी. रफ्तार वाली हवा पॉली हाउस पर कोई दुष्प्रभाव नहीं डाल सकती। बुंदेलखंड में हवा की इतनी रफ्तार कभी नहीं रहती है।
सवाल: एक एकड़ में कितने खीरे का उत्पादन किया जा सकता है। - चंदन सिंह, मदारीपुर
जवाब: पॉली हाउस में एक एकड़ में साढ़े चार से पांच सौ क्विंटल खीरे के आसपास उत्पादन की संभावना रहती है। खीरे की तरह ही टमाटर भी साधारण खेती की अपेक्षा अधिक पैदा किया जा सकता है।
सवाल: इस समय कौन सी फसल का उत्पादन कर रही हैं। कितना लाभ मिल रहा है।- परमार्थ समाज सेवी संस्थान, उरई
जवाब- अभी गोरा चिरैया (ऊमरी) गांव में पॉली हाउस में टमाटर की फसल का उत्पादन किया जा रहा है। बाजार में कितना भी रेट कम होगा, साल भर में 10 से 12 लाख का मुनाफा हो सकता है।
सवाल: पॉली हाउस में क्या जैविक खाद का भी उपयोग किया जा सकता है। - संजय सचान, कानपुर।
जवाब: ऐसा नहीं है कि पॉली हाउस की खेती पूरी तरह से रसायनिक खाद पर निर्भर है। करीब पचास फीसदी जैविक खाद का भी उपयोग किया जाता है। प्रयास है कि पूरी तरह जैविक खाद का इस्तेमाल कर उत्पादन किया जाएगा।
सवाल- पॉली हाउस के लिए किस विभाग से, कैसे मिलेगी मदद। - दीपक (दीपू), ऊमरी (गोरा चिरैया)
जवाब- प्रदेश सरकार के एनएचएम और केंद्र सरकार के एनएचबी विभाग से संपर्क कर पॉली हाउस के लिए 50 फीसदी का अनुदान प्राप्त किया जा सकता है। कम से कम 500 वर्ग मीटर से पॉली हाउस की शुरुआत की जा सकती है।
सवाल- क्या पॉली हाउस से पूरे साल उत्पादन किया जा सकता है। वर्मी कंपोस्ट का कितना प्रयोग किया जा सकता है। - गौरव सिंह, इटावा
जवाब- पॉली हाउस से साल भर तो नहीं, 11 महीने उत्पादन जरूर किया जाता है। एक महीने( जून बेहतर है) पॉली हाउस को खाली कर उसके कीटाणुओं को खत्म किया जा सकता है। रही बात वर्मी की तो एक एकड़ में 40 टन का प्रयोग किया जा सकता है।
सवाल: पॉली हाउस में साधारण खेती की अपेक्षा खाद और पानी की कितनी आवश्यकता पड़ती है।
जवाब- पॉली हाउस में टपक सिंचाई का माध्यम अपनाया जाता है। इसमें पानी कम लगता है। इसका पानी सीधे पौधों की जड़ों तक जाता है। खाद भी काफी कम लगती है। टपक सिंचाई के लिए प्रदेश सरकार की ओर से 90 फीसदी का अनुदान दिया जा रहा है। - हर्षित सिंह, उरई
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