मुहम्मदाबाद। विधानसभा चुनाव में वर्चुअल प्रचार के कारण फ्लैक्स, बैनर का धंधा ठंडा है। फ्लैक्स और प्रिंटिंग की मशीनें ठप पड़ी हैं। पेंटरों का काम भी बंद है। होर्डिंग, बैनर, पोस्टरों की मशीनों का व्यापार करने वालों में निराशा है। कोरोना काल व आचार संहिता लागू होने से होर्डिंगों और कटआउटों में उपयोग होने वाले लकड़ी के फ्रेमों का भी काम बंद होने से बढ़ई वर्ग भी मायूस है। फ्लैक्स व प्रिंटिंग मशीन संचालकों और बढ़ई एवं पेंटरों का कहना है दो दशक पहले चुनाव में प्रचार सामग्री के काम में अच्छी कमाई हो जाती थी। पर इस बार धंधा फ्लॉप है।
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फोटो-11-हनी।
अभी तक नहीं मिला कोई बड़ा काम
फ्लैक्स मशीन संचालक हनी का कहना है कि सात लाख की लागत लगाकर होर्डिंग, बैनर छापने का सेट अप लगाया था। चुनाव नजदीक हैं पर अभी तक कोई बड़ा काम नहीं मिला है। उनका कहना है पार्टियां उम्मीदवारों के नाम घोषित हो तो थोड़ा बहुत काम मिलने की आशा है। वे कहते हैं कभी कभी धार्मिक कार्यक्रमों की होर्डिंग, बैनर छापने पर भी बिजली का बिल और मजदूरी नहीं निकल रही है।
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फोटो-12-विनोद।
पहले फुर्सत नहीं थी, अब काम नहीं
पेंटर विनोद कहते हैं पिछले चुनावों में प्रत्याशियों की ओर से दीवार, बाउंड्रियों की लिखाई के लिए इतना काम मिल जाता था कि फुर्सत नहीं मिलती थी। इस बार कोरोना की तीसरी लहर और उसके बाद वर्चुअल प्रचार होने से काम ठंडा पड़ गया है। इससे दूसरे काम की तलाश में घूम रहे हैं।
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फोटो-13-मुन्ना।
माइक से प्रचार का चलन समाप्त
माइक्रो साउंड सिस्टम संचालक मुन्ना कहते हैं समय के साथ सब बदल गया है। पहले चुनाव प्रचार में चार पहिया वाहन, टैक्सी आदि पर माइक बांधकर प्रत्याशी के प्रचार-प्रसार में गाड़ियां शहर और गांवों के बीहड़ तक घूमतीं थीं। अब तो माइक से प्रचार का चलन समाप्त सा हो गया है।