जालौन। कृषि उत्पादन मंडी समिति जालौन जनपद की प्रमुख मंडियों में शुमार है। यहां धान, गेहूं, चना, मसूर व मटर की खरीद-बिक्री होती है। मंडी समिति की पिछले वित्तीय वर्ष की सालाना आय लगभग आठ करोड़ रुपये रही। इसके बाद भी मंडी समिति सुविधाओं के मामले में कंगाल है। इससे मंडी की विकास की गति धीमी पड़ी हुई है। स्थान की कमी, जलभराव, पेयजल की समस्या, विश्राम गृह की आवश्यकता, दुकानों की संख्या आदि समस्याओं मुख्य हैं।
इस मंडी की स्थापना वर्ष 1984-85 में हुई थी। इसके बाद यहां व्यवसाय के विस्तार के लिए दो प्रमुख हिस्से विकसित किए गए। इनमें पहला गल्ला मंडी और दूसरा थोक सब्जी मंडी। गल्ला मंडी में 149 दुकानें निर्मित की गईं। यहां दो नीलामी चबूतरे बनाए गए हैं, जिन पर धान, गेहूं, चना, मसूर और मटर की नीलामी की जाती है। खासतौर पर हरी मटर का व्यापार पूरे पूरे देश में ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती देशों तक पहुंचता है। थोक सब्जी मंडी में 30 दुकानें बनाई गई हैं और एक नीलामी चबूतरा है। यह मंडी सभी प्रकार की सब्जियों और फलों की बिक्री के लिए जाना जाता है।
मंडी की प्रमुख समस्याएं
धान के सीजन में मंडी परिसर छोटा पड़ जाता है। नीलामी चबूतरों पर अत्यधिक भीड़ हो जाती है और व्यापार प्रभावित होता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बरसात में मंडी में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। मंडी में बनी पानी की टंकी पिछले तीन वर्षों से खराब पड़ी है। किसानों और बाहरी व्यापारियों के रुकने के लिए विश्रामगृह नहीं है।
जलभराव से प्रभावित होता व्यापार
फोटो 2-संदीप तिवारी। स्रोत-स्वयं
व्यापारी संदीप तिवारी ने बताया कि यहां का धान व्यापार बहुत अच्छा है, लेकिन बारिश के समय जलभराव और जगह की कमी व्यापार को प्रभावित करती है। यदि खाली पड़े स्थान का बेहतर उपयोग किया जाए तो कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।
फोटो 3-प्रेमदास गुप्ता। स्रोत-स्वयं
व्यापारी प्रेमदास गुप्ता ने बताया कि मंडी में दुकानों की और जरूरत है। सीजन के समय मंडी में भीड़ सबसे बड़ी समस्या हो जाती है। इससे निपटने के उपाय किए जाने चाहिए। व्यापारी और किसान सीजन में परेशान न हों।
फोटो 6-मंडी सचिव रवि कुमार। स्रोत-स्वयं
मंडी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल निकासी, चबूतरे का निर्माण, विश्राम गृह और पानी की टंकी की मरम्मत जैसे कार्यों के लिए प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलते ही सभी कार्यों को शुरू किया जाएगा। मंडी को आधुनिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है ताकि किसानों व व्यापारियों दोनों को लाभ हो।
- रवि कुमार, मंडी सचिव