उरई (जालौन)। जिला अस्पताल की इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात चिकित्सक समेत स्टाफ पर नशे में धुत कार सवारों ने कार चढ़ाने की कोशिश की। पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया। रात डेढ़ बजे हुई इस घटना से दहशत में आए स्टाफ ने काम ठप कर दिया। इसकी वजह से अस्पताल आने वाले मरीज लौटने लगे। बाद में चिकित्सक की तहरीर पर पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सीओ और कोतवाल ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की और स्टाफ को भरोसा दिया कि मामले में सख्त कार्रवाई होगी। इसके बाद करीब दस बजे स्टाफ ने काम शुरू किया।
बुधवार रात डेढ़ बजे जिला अस्पताल के इमरजेंसी में डॉ. अनुपम मिश्रा, वार्ड बॉय राहुल, फार्मासिस्ट सुबोध नायक व सफाईकर्मी मनोज ड्यूटी पर थे। रात करीब डेढ़ बजे कार से इरफान खान, शेहबान खान, अंशुल मंसूरी, राशिद खान निवासी रामकुंड के पास उरई एक अज्ञात साथी के साथ शराब के नशे में धुत होकर अस्पताल गेट पर खड़े होकर गालीगलौज करने लगे।
शोर सुन कर डॉक्टर व अन्य स्टाफ बाहर आया और गालीगलौज रहे लोगों को शांत रहने के लिए कहा। इतने में कार में बैठे हमलावरों ने वाहन डाक्टर समेत अन्य स्टाफ पर चढ़ाने का प्रयास किया। किसी तरह से स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने को बचाया। इस बीच कार से उतर कर आरोपितों ने डॉ. अनुपम मिश्रा, फार्मासिस्ट सुबोध, वार्ड बॉय राहुल के साथ मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया।
इस बीच अस्पताल से और भी लोग आ गए तो आरोपित कार लेकर भाग निकले। सीओ सिटी उमेश कुमार पांडेय ने बताया कि घायलों का मेडिकल कराने के साथ मामले की जांच की जा रही है। इसमें चार नामजद व एक अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अस्पताल गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। इस घटना के बाद दहशत में आए स्टाफ ने नाराजगी जताते हुए काम ठप कर दिया। करीब दस बजे तक इमरजेंसी वार्ड में काम ठप रहा।
इमरजेंसी बंद, मायूस होकर लौटे मरीज
शहर के मोहल्ला शांतिनगर निवासी राकेश सुबह आठ बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। बताया गया कि इमरजेंसी बंद है। उन्हें ठंडक लगने से उबकाई आ रही है। सीने में दर्द है। अब पता नहीं कितनी देर तक इमरजेंसी बंद रहेगी। फिलहाल इंतजार कर रहे हैं। पटेलनगर निवासी संदीप ने बताया कि उनके पिता भारत सिंह को पैर में चोट लग गई है। इमरजेंसी में दिखाने आए थे। चिकित्सक काम नहीं कर रहे है। अब वापस जा रहे है। थोड़ी देर बात फिर आएंगे। अगर काम शुरू नहीं हुआ तो फिर मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पताल में जाएंगे।
पुलिस चौकी थी बंद, सिक्योरिटी गार्ड भी नहीं था
रात में अस्पताल में खुली पुलिस चौकी बंद थी। बताया गया कि जो भी स्टाफ है, वह गश्त पर था। सिक्योरिटी गार्ड भी मौके पर नहीं मिला। हमले के बाद कार सवार तेजी से भागने लगे। जिसकी वजह से उनकी कार पुलिस चौकी की दीवार और एक पेड़ में भी टकराई। हमले की वजह से स्टाफ में नाराजगी देखी गई। उन्होंने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की मांग उठाई।