उरई। 22 साल पुराने पुलिस पर हमले के मामले में सातों दोषियों को मंगलवार को डकैती कोर्ट ने सात-सात साल कैद की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि गोहन थानाध्यक्ष रामगोपाल दिवाकर ने गोहन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 12 मार्च 2001 को पुलिस बल के साथ मुखबिर की सूचना पर बदनपुरा गांव में मस्तान कसाई के यहां छापेमारी की। जहां कुछ लोग 11 गोवंश ट्रक में लाद रहे थे। पुलिस के रोकने पर बाबू खान, जाकिर खान, साबिर, युसूफ खान, फारूख, मुस्लिम, इदरीश, शफीक, उस्मान, अजमेरी व रहमत उल्ला निवासीगण बदनपुरा ने करीब 35 अज्ञात साथियों के साथ पुलिस पर हमला बोल दिया। उन्होंने गोवंश को भगा दिया और पुलिस की रायफलें, दरोगा की रिवाल्वर व सोने की चेन व ढाई हजार रुपये लूट लिए। साथ ही मस्तान के बाहरी इलाके में बने कमरे में बंद कर दिया। इसी बीच कई थानों की फोर्स आ गई तो आरोपी भाग गए। पुलिस ने कमरे में बंद साथियों को निकाला और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।
विवेचना में मस्तान, बाबू खां, जाकिर खान, युसुफ, उस्मान, इदरीश, अजमेरी, रहमतउल्ला, मुस्लिम समेत 11 नामजद और 30 अज्ञात के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इसमें मुस्लिम नाबालिग होने के लिए उसका मामला किशोर न्यायालय में चल रहा है। अजमेरी और रहमतउल्ला की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई थी। बुधवार को डकैती कोर्ट के जज अंचल लवानिया ने बाबू खा, जाकिर खान, युसुफ, फारूख, शफीक, उस्मान, इदरीश को दोषी पाते हुए सात सात साल की कैद की सजा सुनाई। साथ ही बाबू खां, युसुफ, फारूख, शफीक, उस्मान को 15 हजार रुपये अर्थदंड व इदरीश व उस्मान को सात-सात हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।