उरई। विधानसभा चुनाव में पुलिस को जिंंदा लोगों से ही नहीं मर चुके लोगों से भी शांति भंग होने का डर सता रहा है। इसलिए पुलिस मर चुके लोगों पर शांति भंग की कार्रवाई करने के बाद जमानत के लिए उनके घरों में नोटिस भी भेज रही है। ऐसा ही एक मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का सामने आया है, जहां पुलिस ने आठ साल पहले मर चुके एक शख्स के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की है। कोर्ट से जमानत कराने के लिए उसके घर में नोटिस भी भेजा है।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पुलिस अराजकतत्वों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई कर रही है। इस दौरान यह भी ध्यान दे रही है कि जिस पर कार्रवाई की जा रही है वह जीवित है या परलोक सिधार चुका है। ऐसा ही एक मामला गुरुवार को सामने आया है। इसमें शहर के विजय नगर निवासी देवेंद्र प्रताप सिंह से चुनाव में खतरा बताते हुए पुलिस ने उनके खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई कर दी। इतना ही नहीं परलोक सिधार चुके देवेंद्र के घर के पते पर नोटिस भेजकर कोर्ट से जमानत कराने के आदेश भी दिया हैं।
परिजनों ने बताया कि 10 अक्टूबर 2014 को देवेंद्र की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके भी पुलिस ने देवेंद्र के खिलाफ शांति भंग की धारा 107/116 के तहत कार्रवाई की है। अब वह समझ नहीं पा रहे हैं कि देवेंद्र को परलोक से नीचे बुलाकर कोर्ट में कैसे जमानत कराएं। इतना ही नहीं कोतवाली पुलिस ने अब तक जिन लोगों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई करते हुए नोटिस भेजा है। इसमें शहर में रहने वाले शिक्षा मित्र शिवेंद्र मोहन, बार संघ के कोषाध्यक्ष पंकज कुमार, व्यापारी प्रतीक, सर्राफा व्यापारी आशीष सहित पुलिस ने 16 ऐसे लोगों को नोटिस भेजा है जिनके खिलाफ अभी तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इस मामले कोतवाली प्रभारी शिवकुमार राठौर का कहना है कि मानवीय भूल के कारण यह नोटिस मृतक के नाम चला गया। नोटिस बाद में वापस ले लिया गया है।