उरई। कथित पुलिस मुठभेड़ मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंजू राजपूत ने तत्कालीन डकोर कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार मिश्रा, दो दरोगाओं और छह सिपाहियों को 11 फरवरी को तलब किया है। वर्ष 2018 में हुई पुलिस मुठभेड़ का यह मामला काफी चर्चित रहा है।
डकोर कोतवाली क्षेत्र के ऐर निवासी जुझार सिंह राजपूत (अब ग्राम प्रधान) उनके भाई लालसिंह और साथी कुलदीप अहिरवार को 25 दिसंबर 2018 में पुलिस ने मुठभेड़ दिखाकर हत्या का प्रयास मामले में 26 दिसंबर 2018 में जेल भेज दिया था। हालांकि अदालत ने पहली नजर में मुठभेड़ को संदिग्ध मानते हुए हफ्ते भर के भीतर ही तीनों आरोपियों को जमानत दे दी थी। इस मामले में जुझार सिंह ने धारा 156 (3) के तहत कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। इसमें कहा था कि तत्कालीन डकोर कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार मिश्रा (वर्तमान ललितपुर जिले में तैनात है), दरोगा रामवीर, अजय कुमार व सिपाही अमिल सोलंकी, त्रिलोकी नाथ त्रिवेदी, अजय कुमार त्रिपाठी, ज्ञानेंद्र मिश्रा, गंगासागर व सुघर सिंह ने उनसे रुपये की मांग की। रुपये न देने पर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर तीनों को जेल भेज दिया था। अदालत के आदेश पर दो अप्रैल 2019 को पुलिस ने तत्कालीन कोतवाली प्रभारी समेत 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। इस मामले का ट्रायल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंजू राजपूत की अदालत में चल रहा है। सीजेएम ने मामले में सभी आरोपी पुलिसकर्मियों को कोर्ट में तलब किया है। अधिवक्ता रमाकांत सिंह चौहान ने बताया कि इस मामले में अगली तारीख 11 फरवरी लगी हुई है। बता दें कि जुझार सिंह पर भी कई मामले चल रहे हैं।