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धन की नहीं, तन व मन की होती है लीलाएएए

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कोंच की रामलीला में अबिनय करते कलाकार (फाइल फोटो) - फोटो : ORAI
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कोंच। जिले में वैसे तो तीन स्थानों कोंच, जालौन व उरई में रामलीला का मंचन होता है। इसमें सबसे पुरानी रामलीला कोंच की 169 साल पुरानी है और लिम्का बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज है। इसके अलावा जालौन व फिर उरई की रामलीला का मंचन शुरु हुआ था। इसमें कोंच की ऐतिहासिक रामलीला वाकई निराली है। इस कारण इसकी भव्यता अधिक है। यहां की एक बात और निराली है। लीला के कलाकार धन के लिए नहीं बल्कि तन और मन की संतुष्टि के लिए अभिनय करते हैं। जानकर ताज्जुब होगा कि लीला के जितने भी कलाकार है सभी कोंच क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। कोई नौकरी तो कोई रोजगार से जुड़ा है। दिनभर के कामकाज के बाद शाम को लीला में मंचन करते है। कलाकारों का कहना है कि धनोपार्जन के लिए ईश्वर की कृपा से ही साधन उपलब्ध है। बस स्वयं को भगवान से जोड़ने का साधन मानकर लीला में निशुल्क अभिनय करते आ रहे हैं। इसके पीछे की एक मंशा यह भी है कि जब भगवान का चरित्र निभाएंगे तो भगवान भी उनसे कभी कोई गलत काम न कराएंगे। प्रस्तुत है, लीला के इन्हीं कुछ कलाकारों से बातचीत पर आधारित खबर।
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फोटो-03 संजय
संजय सिंघल पिछले 30 वर्षों से रामलीला में अभिनय कर रहे हैं। वह रावण, बाणासुर, निषादराज आदि पात्रों को रंगमंच पर जीवंत कर चुके है। संजय पेशे से परिषदीय विद्यालय में शिक्षक हैं और रामलीला में बिना पारिश्रमिक सेवाएं प्रदान करते हैं। उनका कहना है कि लीला सिखाती है कि जीवन में कभी किसी के साथ धोखा, अन्याय न करो। बस उन्हें इसी में आनंद आता है।
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फोटो-04 रूपेश सोनी
रूपेश सोनी पेशे से दुकानदार हैं। उन्हें रावण व बालि के किरदार निभाने में खूब आनंद आता है। लीला में निशुल्क अभिनय करने वाले रूपेश का कहना है कि लीला का मंचन सिखाती हैं कि कभी अपने भाई से बैर नहीं बनाना चाहिए। परिवार में सदैव प्रेम भाव से रहना चाहिए और दूसरों को भी यही सीख देनी चाहिए।
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फोटो-05 मोहनदास
मोहनदास नगाइच बिजली विभाग में ठेकेदार हैं और दुकानदारी भी करते हैं। वह रामलीला में हनुमान, बालि, रावण, अक्षय कुमार जैसे पात्रों को सजीवता प्रदान कर रहे हैं। कहना है कि उन्हें लीला का पसंदीदा पात्र हनुमान का ही लगता है। जिसमें अपने स्वामी के प्रति समर्पण की भावना दिखाई देती है। फिर लंकेश का पात्र भी बहुत कुछ सिखाता है। लीला में काम करने के पारिश्रमिक का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
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फोटो- 06 नरोत्तमदास
कोंच निवासी नरोत्तमदास स्वर्णकार को हरफनमौला कलाकार के रूप में जाना जाता है। पेशे से दुकानदार नरोत्तम मंझे हुए अभिनेता हैं। वह रामलीला में स्त्री और पुरुष दोनों पात्रों को सहजता से निभाते हैं। इसके अलावा रावण, मेघनाद, अक्षयकुमार, सुग्रीव, मंदोदरी, मंथरा आदि किरदार निभाने के साथ साथ सांकेतिक विभाग में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका कहती है। कहना है कि निशुल्क सेवा करने प्रभु के प्रति आस्था और बढ़ती जा होती है।
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