जालौन। क्षेत्र की गोशालाएं बंद होने से अन्ना जानवर खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। बारिश के मौसम में रात-रातभर जागकर खेतों की रखवाली कर रहे किसान दिन रात मेहनत के बाद भी अपनी फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। क्षेत्रीय ग्राम अकोढ़ी दुबे में अन्ना जानवरों ने लगभग 70 बीघा फसल बर्बाद कर दी। सूचना के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। जिसके चलते किसान मायूस हैं।
प्रदेश की योगी सरकार गोवंशीय पशुओं के संरक्षण को लेकर काफी गंभीर है। गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री द्वारा प्रत्येक गांव में अस्थायी अथवा स्थायी गोशाला का निर्माण कराया गया है। जहां अन्ना पशुओं को रखकर उनके चारे पानी की व्यवस्था कराई गई थी। गोशालाएं बनने के बाद काफी हद तक अन्ना पशुओं पर लगाम भी लगी थी। जो किसान अन्ना पशुओं की समस्या से परेशान थे उन्होंने भी काफी हद तक राहत की सांस ली थी। लेकिन कोरोना के आते ही सब कुछ बदल गया।
ऐसा ही कुछ क्षेत्रीय गांव अकोढ़ी दुबे में भी हुआ। जहां अन्ना जानवरों के झुंड ने गांव के किसान मूलशरण कुशवाहा, पुनीत दुबे, अंबिका पिपरैया, शिवसिंह कुशवाहा, बृजेश पाल, रामकुमार बाथम, राजेंद्र विश्वकर्मा आदि के खेतों में घुसकर 70 बीघा से अधिक तिल, उड़द, मैंथा आदि की फसल को बर्बाद कर दिया है। उक्त किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर फसलों की बुवाई की थी।
ताकि पैदावार होने पर कर्ज को चुका सकें और घर खर्च चला सकें। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शिवकुमार बताते हैं कि गोशाला में भूसा आदि की व्यवस्था के लिए लगभग 6 माह पूर्व धनराशि मिली थी उससे कहीं अधिक धनराशि वह अपनी ओर से खर्च कर चुके हैं। ऐसे में कब तक वह घर से रुपये लगाते रहेंगे। खेत खाली होने पर पशुओं को गोशालाओं से छोड़ दिया गया था। उन्होंने बताया कि जो भी पशु अन्ना हैं वह गांव के ही पशुपालकों के हैं। यदि पशुपालक अपने पशुओं को बांधकर रखें तो यह समस्या नहीं होगी। इस संदर्भ में एसडीएम सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि अभी उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। फिर भी वह जांच कराकर गोशालाओं का संचालन शुरू कराएंगे।