उत्तरप्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए संविदा अनुदेशकों की भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया है।
कला शिक्षण में फर्जी डिग्री हासिल करके आवेदन करने वालों का मामला सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य शिक्षा तथा कार्यानुभव शिक्षा में अनुदेशकों की भर्ती में भी फर्जी बीपीएड/डीपीएड के साथ आईटीआई एवं होम साइंस में फर्जी डिग्री लगा अभ्यर्थियों ने मेरिट में जगह पा ली है।
संविदा अनुदेशकों के पदों पर नियुक्ति के लिए फरवरी-मार्च में आवेदन मांगा गया था।
बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से मेरिट जारी होने और पहले चरण की काउंसिलिंग के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को बड़ी संख्या में सिक्किम एवं मेघालय के विश्वविद्यालयों से जारी डिग्री मिली।
इलाहाबाद में इतने बड़े पैमाने पर एक ही विश्वविद्यालय की डिग्री मिलने का मामला सामने आने के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी एलर्ट जारी किया गया है।
आरंभिक जांच में ही प्रदेश के अन्य जिलों कौशांबी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी में इस प्रकार के मामले सामने आए हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से भी बीएसए को फर्जी डिग्री लगाने वालों पर अंकुश लगाने की बात कही गई है।
इलाहाबाद में कला शिक्षण से जुड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद स्वास्थ्य शिक्षा तथा कार्यानुभव शिक्षा के प्रमाण पत्रों की जांच में भी फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है।
इसमें बड़ी संख्या बीपीएड, डीपीएड एवं आईटीआई के प्रमाण पत्र ऐसे संस्थान से जारी हो गए हैं जो पहली ही नजर से देखने में फर्जी लगते हैं।
इन प्रमाण पत्रों को हासिल कर मेरिट में जगह बनाने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों को संदिग्ध मानने वाले अधिकारी भी जांच के बाद कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
बीएसए इलाहाबाद पीके शर्मा का कहना है कि काउंसिलिंग के बाद सभी प्रमाण पत्रों की जांच संबंधित संस्थानों से कराई जाएगी। इसके बाद ही कोई कार्रवाई संभव होगी।