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ज़िया की मौत के साथ बिखर गए सपने

Wed, 06 Mar 2013 11:11 AM IST
सलेमपुर/देवरिया/ब्यूरो।
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निकाह की तारीख मुकर्रर होने के साथ ही डॉ. परवीन आजाद के भविष्य के सपनों में रंग भरने मारने लगे। ज्यों-ज्यों निकाह की तारीख नजदीक आती गयी वह मन में सजोए सपनों को साकार रूप देने की योजनाएं बनाने लगी। दोनों का लक्ष्य और विचार एक दूसरे से मिलता जुलता था। निकाह के बाद दोनों का साझा सफर महज 384 दिन का ही रहा।
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2008 में जब ज़ियाउल हक पीपीएस परीक्षा पास किया तो परवीन आजाद अलीगढ़ युनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई पूरा कर लीं थीं। बिहार के सिवान निवासी राजदेव सिंह इंटर कॉलेज के उर्दू विषय के प्रवक्ता बाबूदीन आजाद अपनी बेटी डॉ. परवीन आजाद की शादी के लिए जुआफर गांव ज़ियाउल हक के पिता शमशुल के पास रिश्ते के लिए पहुंचे। शमशुल हक कहते हैं कि रिश्ते तो बेटे के लिए बहुत आते थे, लेकिन परवीन आजाद के परिवार वालों को रहन, सहन और विचार मुझे काफी जमा। परवीन आजाद की फोटो देखने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने भी यह रिश्ता पक्का कर लिया। शमशुल बताते हैं कि जब मैने अपने बेटे ज़ियाउल से फोन पर यह बात बताई तो उसने भी हामी भर दी। नवंबर 2011 में परवीन आजाद की सगाई हो गई।

शौहर की मौत के बाद बदहवास परवीन बतातीं हैं कि सगाई के बाद से दोनों एक दूसरे से मोबाइल के जरिए बात किया करते थे। सगाई के बाद मन में समाज सेवा, हंसता खेलता खुशहाल परिवार, गांव में स्कूल, स्टेडियम व अस्पताल बनवाने सहित तमाम सपनों को साकार रूप देने के लिए निकाह का इंतजार कर रहीं थीं। 21 जनवरी वर्ष 2012 को जब निकाह हुआ तो चार दिन तक पति के साथ गांव में रहीं थीं। उसके बाद बीडीएस की पढ़ाई करने बाबू बनारसी दास डेंटल कॉलेज लखनऊ चलीं गयीं।
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जुआफर गांव के ज़ियाउल पहले ऐसे व्यक्ति थे जो सीओ बने थे। मेरे शौहर के अंदर कूट-कूट कर ईमानदारी भरी थी। गमज़दा परवीन आजाद ने बताया कि जब हम लोगों से बात होती थी तो शौहर गांव में एक अच्छा स्कूल और स्टेडियम बनवाने की बात करते थे तो मैं गांव में अस्पताल खोलकर समाजसेवा की बात बोलती थीं तो वह ठहाके मारकर हंसते हुए बोलते थे तुम्हारा और मेरा विचार व लक्ष्य एक दूसरे से काफी मिलता जुलता है। अल्लाह चाहेंगे तो यह सपना जल्द ही सकार होगा। कुंडा में जब उनकी तैनाती हुई तो वह अगस्त माह में एक दिन के लिए हॉस्टल से मुझे वहां ले गए थे। रात में भोजन करते समय ही अपने आप को असुरक्षित होने की बात बताए थे।

परिवार की सुरक्षा का भय सता रहा है
शहीद जियाउल हक की पत्नी डॉ. परवीन को अपना और अपने परिवार की सुरक्षा का भय सता रहा है। वह अपने को असुरक्षित महसूस कर रहीं हैं। उनका कहना था कि सम्मानजनक नौकरी मिली तो कर लूंगी, नहीं तो मेडिकल की पढ़ाई को पूरी करूंगी। चर्चा में आने के लिए मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया था। मै चाहती थी कि ज़ियाउल के घावों को मुख्यमंत्री स्वयं देख लें। खतरे के बावजूद न्याय के लिए आवाज उठाना बंद नहीं करूंगी ताकि फिर कोई इस तरह की घटना का शिकार न हो।

डबडबाई आंखों से डॉ. परवीन बतातीं हैं कि जिस तरह से साजिश के तहत उनके पति की हत्या की गई है उससे वह अपने और अपने परिवार को असुरक्षित महसूस कर रहीं हैं। उनका कहना है कि मैं कोई लड़ाई नहीं लड़ रहीं हूं और न ही कोई मुहिम छेड़ रखी है। न्याय के लिए आवाज उठा रहीं हूं ताकि इस तरह की घटना दोबारा न हो। हमारे नेता और अधिकारी सोचने के लिए मजबूर हों। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री पर भरोसा है। यदि मांगे नहीं पूरी हुई तो समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह से गुहार लगाऊंगी।

उन्होंने कहा कि बायोडाटा मांगा गया है। यदि सम्मानजनक नौकरी मिली तो मैं जरूर करूंगी नहीं तो मेडिकल की पढ़ाई को पूरी करूंगी। उनका कहना था कि बालू खनन में पकड़ी गई ट्रकों को छोड़ने के बाद जियाउल तनाव में थे और उन्हें ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री के जनता दरबार में जाने को कह रहे थे। उन्होंने बताया कि तीन दिनों से भोजन नहीं की हूं, फिर भी न्याय के लिए बोल रही हूं। डॉ. परवीन का मानना है कि पोलिटिकल सिस्टम बेहद कमजोर है। उनका कहना था कि इंसाफ हर हाल में चाहिए।
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