उत्तर प्रदेश के घुड़सवार पुलिस के लिए की गई घोड़ों की खरीद में भारी गड़बड़झाला उजागर हुआ है।
पुलिस हेडक्वार्टर का आदेश है कि गर्भवती घोड़ियों की खरीद बिलकुल न की जाए। लेकिन पंजाब के फरीदकोट से जो 31 घोड़े खरीदे गए थे उनमें से दो घोड़ियां गर्भवती निकलीं।
यह दोनों ही 25 मार्च को ट्रेनिंग के लिए पुलिस अकादमी लाई गई थीं। अब अकादमी प्रशासन इन्हें वापस करने के लिए लिखा-पढ़ी कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के सभी बड़े शहरों में घुड़सवार पुलिस की व्यवस्था है। इसी के मद्देनजर क्रय समिति का गठन कर 31 घोड़ों की खरीद के लिए करीब तीस लाख का बजट जारी किया गया था।
क्रय समिति में आईजी आशीष गुप्ता, डीआईजी अखिल कुमार, चिकित्सक डॉ. सचिन कुमार, आरआईएमपी ओमवीर सिंह, आरआईएमपी रामस्वरूप, शिवाजी दुबे और इंद्रपाल थे।
कमेटी के सदस्य घोड़ों की खरीद करने के लिए फरीदकोट गए थे। 25 मार्च 2013 को 31 घोड़े खरीद लिए गए। इनमें से 15 घोड़े लखनऊ पुलिस को दिए गए जबकि 10 घोड़े कानपुर को।
छह घोड़े ट्रेनिंग के लिए पुलिस अकादमी को आवंटित हुए। इनमें चार नर हैं और दो मादा। अकादमी प्रशासन ने सभी छह घोड़ों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए आईवीआरआई बरेली के चिकित्सकों को बुलाया। डाक्टरों ने ब्लड और यूरिन के सैंपल भरे। जांच में दो घोड़ियां गर्भवती निकली हैं।
पुलिस अकादमी के डायरेक्टर और एडीजी एके जैन ने बताया कि गर्भवती घोड़ी की खरीद नहीं होनी चाहिए थी। हो सकता है कि घोड़ा व्यापारी ने गर्भवती होने की बात पुलिस अफसरों से छुपाई हो।
जांच रिपोर्ट आने के बाद इन दोनों घोड़ियों को वापस करने की तैयारी की जा रही है। क्रय समिति के अध्यक्ष आईजी आशीष गुप्ता को भी इसकी जानकारी दे दी गई है।