मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वीकार किया कि सूबे में बिजली संकट है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रही है। प्रदेश को विकास के रास्ते पर लाने के लिए कुछ कड़े फैसले भी लिए गए हैं। इसमें बिजली दरों की बढ़ोतरी भी है।
पिछली सरकार के कार्यकाल में निगम को 25 हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। उन्होंने यह कहकर खिल्ली भी उड़ाई कि बसपा सरकार में ट्रांसफार्मरों में तांबे की जगह एल्युमीनियम के तार लगाए गए थे, जिससे ट्रांसफार्मर फुंक जाते थे।
बौरी गांव में शनिवार को पूर्व विधायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गंजी प्रसाद की 16वीं पुण्यतिथि पर शिरकत करने के बाद चंदौली के नियामताबाद में आयोजित सभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव तीन या छह महीने में कभी हो सकते हैं।
चुनाव में पार्टी उन्हीं के टिकट फाइनल करेगी जिनके जीतने की संभावना है। उन्होंने प्रदेश में समस्याओं के लिए
मायावती सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि सपा के घोषणा पत्र को शत प्रतिशत पूरा किया जाएगा। यूपी के विकास के लिए काम शुरू कर दिए गए हैं। हमारे पास चार साल का समय है। सपा सरकार में गेहूं की खरीद बडे़ पैमाने पर हुई है।
किसानों को मुफ्त में सिंचाई सुविधा के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। बसपा सरकार में सबसे ज्यादा उपेक्षा किसानों और नौजवानों की हुई लेकिन सपा सरकार बनने के बाद इनके लिए तमाम योजनाएं शुरू की गई हैं। किसानों का बीमा पांच लाख कर दिया गया है। छात्रों को लैपटाप की सुविधा उपलब्ध कराकर उन्हें आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
नक्सलियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नक्सली घटनाओं पर चिंता जताते हुए नक्सल गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही। बौरी में कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सली विकास से भटके हुए हैं। उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का भी कार्य किया जाएगा।