पिछले आठ दिनों से जारी राज्य कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रदेश सरकार को साफ निर्देश दिया है कि चौबीस घंटे के भीतर कर्मचारियों से वार्ता कर समस्या का हल निकाला जाए। वार्ता विफल रहे और समाधान ना निकले तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।
न्यायमूर्ति एसके सिंह और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने सरकार को आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बहाल रखने का भी निर्देश दिया है ताकि आम आदमी को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मामले की अगली सुनवाई 22 नवंबर को होगी।
जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार पंडिता ने दाखिल की है। याचिका पर पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता आचार्य राजेश त्रिपाठी, चंदू त्रिपाठी और गुलाब चंद्र मौजूद थे।
याचिका में कहा गया कि उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, राज्य कर्मचारी महासंघ और राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के संयुक्त तत्वावधान में 12 नवंबर से हड़ताल जारी है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है। आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
याचिका में समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का भी आधार लिया गया है। अदालत से मांग की गई है कि हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा आचरण नियमावली 1956 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। याचिका में कर्मचारियों की हड़ताल को असंवैधानिक करार दिया गया है।