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हाथरस : हाथरस के युवक ने प्रतिभा का मनवाया लोहा

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हाथरस : प्रोफेसर संदीप सिंह सेंगर। संवाद - फोटो : HATHRAS
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गोविंद उपाध्याय
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हाथरस। प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती। यदि प्रतिभा है तो वह अपना मुकाम हासिल करके ही रहेगी। हाथरस जंक्शन क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले प्रतिभाशाली होनहार युवक ने अपनी योग्यता के बल पर यूके में कार्डिफ मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर की नौकरी हासिल की है। विदेश में उन्हें इस साल छह स्थानों पर शानदार नौकरी का ऑफर मिला है। इसमें से उन्होंने यूके में एक विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं देने का निर्णय लिया है।
हाथरस जंक्शन के गांव वाहनपुर के रहने वाले डॉ. संदीप सिंह सेंगर का जन्म मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। संदीप के पिता यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक पद से रिटायर हो चुके हैं। उनकी मां गृहिणी हैं। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े संदीप ने हाईस्कूल व इंटर यूपी बोर्ड से पास किया। बीएससी उन्होंने पीसी बागला कॉलेज से की। तदुपरांत जीएलए विश्वविद्यालय से एमसीए करने के बाद मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद से एम टेक किया। उनकी शिक्षा निरंतर जारी रही।
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उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान धनबाद से पीएचडी की उपाधि ली। ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े संदीप ने अपनी लगन, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर विदेश में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। इस साल उनका यूनाइटेड किंगडम (यूके) आयरलैंड और दक्षिण कोरिया में प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रतिष्ठित पद पर चयन हुआ। इसमें कार्डिफ मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी यूके, ग्रीनविच यूनिवर्सिटी लंदन, टेकभनीकल यूनिवर्सिटी डबलिन आयरलैंड और यूटा विश्वविद्यालय एशिया कैंपस दक्षिण कोरिया में प्रोफेसर पद पर चयन हुआ। इसके अलावा डॉ. संदीप का यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर यूके और न्यूकैसल यूनिवर्सिटी यूके में वैज्ञानिक के रूप में संविदात्मक पद पर भी चयन हुआ। इसमेें उन्होंने यूके में कार्डिफ मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद को प्राथमिकता दी और सेवाएं देने का निर्णय किया है। संवाद
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बीच के बॉक्स के लिए--
माता-पिता, परिजनों को दिया उपलब्धि का श्रेय
हाथरस। प्रो. संदीप सिंह सेंगर ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता व अन्य परिजनों को दिया है। उनका कहना है कि मेहनत करने से सबकुछ संभव है। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कैरियर इसलिए चुना, क्योंकि वह प्रोफेसर पद पर रहते हुए पढ़ा भी सकते हैं और रिसर्च भी कर सकते हैं। संवाद
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