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हाथरस : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा दुलर्भ पूर्ण जयंती योग

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हाथरस : आचार्य बल्लभजी महाराज। संवाद - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव तीस अगस्त को अष्टमी के दिन मनाया जाएगा। इस बार रोहणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि और हर्षण योग यानी पूर्ण रूप से जयंती योग बन रहा है। तामसी वृत्ति के कलियुग में ऐसा योग दुर्लभ माना गया है। श्रद्धालु तीस अगस्त को रात बारह बजे उत्सव मनाएंगे।
आचार्य बल्लभ जी महाराज ने बताया कि श्रद्धालु उपवास रखकर घरों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। भगवान कृष्ण को तुलसी अति प्रिय है। इसलिए सजावट में तुलसी दल का प्रयोग किया जाता है। भगवान बासुदेव के द्वादश मंत्र ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का निरंतर पाठ करते हैं। ऊं नमो नारायण नम: यह मंत्र विशेष शांति प्रदान करने वाला है। उन्होंने बताया कि पुराने समय में दीवार पर हल्दी, गेरु, हरी पत्तियों के रस, कोयले को पीसकर श्रीकृष्ण के स्वरूपों और उनके द्वारा किए गए पूतना वध के चित्र अंकित किए जाते थे। आजकल बाजार में जन्माष्टमी के पोस्टर मिल जाते हैं।
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ऐसे करें जन्मोत्सव पर पूजा
श्रद्धालु नित्य कर्म के बाद उपवास का संकल्प लें। दूध, दही, शहद, चीनी, जल और पंच मेवा से पंचामृत तैयार करें। रात में साढ़े 11 बजे तक पूजा की सभी सामग्री एकत्रित कर लें। फिर भगवान का ध्यान करें। उनसे प्रार्थना करें कि हमारे घर में पधारें। लड्डू गोपाल की प्रतिमा को सर्वप्रथम जल से स्नान कराएं। फिर पंचामृत से स्नान कराएं। पुन: जल से स्नान कराने के बाद वस्त्र पहनाएं। विशेष पूजा के लिए दूध, दही, देसी घी, शहद, शर्करा, पंचामतृ जल से स्नान कराना चाहिए। आरती के साथ पंच मेवा लड्डू का भोग लगाए। प्रसाद वितरण करें। संवाद
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