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हाथरस : सिकंदराराऊ की जनता ने जाति से ऊपर उठकर चुना विधायक

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राकेश वार्ष्णेय
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सिकंदराराऊ। सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक मिजाज जिले के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों से अलग है। इस विधानसभा क्षेत्र की जनता ने हर जाति के व्यक्ति को विधायक चुनकर भेजा है। कभी यहां की जनता लहर में बही तो कभी किसी के ग्लैमर से प्रभावित होकर उसे विधायक बना दिया। यहां का दुर्भाग्य ही रहा है कि इस विधानसभा क्षेत्र से जीतकर कोई भी विधायक मंत्री नहीं बन पाया है।
बेशक सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र ठाकुर बहुल है, फिर भी ऐसा नहीं है कि यहां से हर बार ठाकुर जाति का ही विधायक बना हो। शुरू में यहां से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित नेकराम शर्मा चार बार विधायक चुने गए। नेकराम शर्मा के बारे में कहा जाता है कि वह लोगों की समस्या सुनकर उसका निराकरण कराने के लिए अधिकारियों के पास जाते थे। उच्च शिक्षित होने की वजह से शर्मा के तर्कों के आगे अधिकारी पस्त हो जाते थे। अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर सुरेश प्रताप गांधी तीन बार यहां से विधायक चुने गए। इसके बाद दो बार यशपाल सिंह चौहान विधायक चुने गए। दो बार अलीगढ़ के गांव नगला देवी निवासी अमर सिंह यादव विधायक चुने गए। वैश्य वर्ग से जगदीश गांधी विधायक बने। एक बार पुष्पा चौहान विधायक बनीं। मुस्लिम समाज से फरजंद अली बेग भी विधायक चुने गए। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय भी इस क्षेत्र से विधायक चुने जा चुके हैं।
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नेकराम शर्मा ने 1952 से जो विजय अभियान शुरू किया, वह 1967 तक चला। उनका वर्चस्व वैश्य वर्ग के जगदीश गांधी ने तोड़ा। गांधी ने लखनऊ में सिटी मांटेसरी स्कूल से शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की। बताया जाता है कि दलितों, पिछड़ों के पांव छूकर उनके साथ भोजन करके उन्होंने खूब वोट बटोरे। हालांकि दूसरी बार उन्हें जनता ने नकार दिया। इस बार भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के टिकट पर मुस्लिम समाज के सूफियाना मिजाज वाले फरजंद अली बेग विधायक बने। बेग का दो टूक व्यवहार जनता को बहुत पसंद आया था। इसके पश्चात 1980 में वीरबहादुर सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में पुष्पा चौहान विधायक बनीं।
यहां 1985, 1989 और1991 में सुरेश प्रताप गांधी विधायक चुने गए। सुरेश प्रताप गांधी का दुर्भाग्य रहा कि उनके समय में कभी उनकी पार्टी की सरकार नहीं बनी, लेकिन अपनी ईमानदारी और जनसेवा के लिए वह जाने जाते हैं। 1993 में बसपा तथा सपा गठबंधन के प्रत्याशी नगला देवी निवासी अमर सिंह यादव चुनाव जीते। इसके बाद भाजपा ने 1996 में क्षत्रिय समाज के युवा प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान को मैदान में उतारा। यशपाल ने दमदारी से चुनाव लड़ा और पहली बार भाजपा को जीत दिलवाई। भाजपा शासन में ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान हुई हिंसा में अमर सिंह यादव पर रासुका लगा और वह 11 माह जेल में रहे। जेल से लौटने के बाद जनता में उनकी पैठ बढ़ गई। वह 2002 में विधायक बन गए।
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इसके बाद यशपाल सिंह चौहान ने पुन: भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत गए। 2012 में यशपाल सिंह चौहान सपा से चुनाव लड़े। उन्हें पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने कड़े संघर्ष के बाद मामूली अंतर से पराजित किया। 2017 में भाजपा ने वीरेंद्र सिंह राना को अपना प्रत्याशी बनाया। सपा से पुन: यशपाल सिंह चौहान लड़े और बसपा ने बनी सिंह बघेल को प्रत्याशी बनाया। इस बार यशपाल तीसरे नंबर पर खिसक गए। बसपा दूसरे नंबर पर रही। संवाद
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