संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
स्थानीय न्यायालय ने एक मामले में पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय व उनके निजी सचिव रानू पंडित के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किए है। पूर्व मंत्री व उनके निजी सचिव पर एक पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य को जातिसूचक गालियां देने और अपहरण का प्रयास करने का आरोप है। मामला न्यायालय में चल रहा है।
वीरेंद्र कुमार निवासी गंभीर पट्टी बिसाना थाना चंदपा ने आरोप लगाया था एक सितंबर 2019 को रामवीर उपाध्याय, उनके निजी सचिव रानू पंडित व छह-सात अन्य लोगों ने उसे जातिसूचक गालियां देते हुए जान से मारने की नीयत से उसका अपहरण करने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ के चलते यह लोग सफल नहीं हो सके।
वीरेंद्र का कहना था कि वह तभी से अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हो रही। वीरेंद्र कुमार क्षेत्र पंचायत सदस्य भी रहा है। उसने यह प्रार्थना पत्र अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या चतुर्थ के न्यायालय में दिया था।
कोर्ट ने रामवीर उपाध्याय व उनके पीए रानू पंडित को धारा 365 व 3(1) (ध) एससी-एसटी एक्ट में जरिए सम्मन तलब किया था। उसके बाद कोर्ट ने जमानती वारंट भी जारी किए थे। स्थानीय न्यायालय के तलबी आदेश के विरुद्ध रामवीर उपाध्याय व उनके सचिव की ओर से उच्च न्यायालय इलाहबाद में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इस पर पांच जनवरी को हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कार्यवाही स्थगित कर दी थी।
अब हाईकोर्ट ने इस स्थगनादेश को समाप्त कर दिया है। इस पर फिर एडीजे कक्ष संख्या चतुर्थ के न्यायालय में वीरेंद्र कुमार ने प्रार्थना पत्र दिया और उच्च न्यायालय के सात मार्च को दिए गए आदेश की जानकारी दी गई। स्थानीय कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस आदेश का सत्यापन कराया गया, जो सही पाया गया।
अब एडीजे कक्षा संख्या चतुर्थ ने इस मामले में पूर्व रामवीर उपाध्याय व रानू पंडित उर्फ प्रवेश भारद्वाज के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि रामवीर व रानू पंडित को इस वाद की समस्त जानकारी है, लेकिन वह न्यायालय के समक्ष जानबूझकर उपस्थित नहीं हो रहे। यह मामला एमपी-एमएलए से संबंधित होने के कारण इसका जल्द निस्तारण होना है, इसलिए इनके एनबीडब्ल्यू जारी हों।