न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
ओवरब्रिज के उद्घाटन को भी कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन रोडवेज बसों का शहर के अंदर से आवागमन न होना हाथरस ही नहीं, बल्कि आगरा और अलीगढ़ से हाथरस आने वाले मुसाफिरों के भी जी का जंजाल बन गया है। रोडवेज बसें अब भी धड़ल्ले से बाईपास होकर ही आवागमन कर रही हैं। यात्रियों को रात के अंधेरे में आगरा रोड और अलीगढ़ रोड पर बाईपास के कोनों पर ही उतार दिया जाता है। वहां से उन्हें शहर के अंदर तक पहुंचने के लिए या तो तकरीबन छह से सात किमी की पैदल यात्रा करनी पड़ती है या फिर वाहनों के इंतजार में घंटों वहां खड़े रहना पड़ता है। बाईपास के सुनसान मुहानों पर खड़े रहना खतरे से खाली नहीं होता। खासकर महिलाओं और बच्चों के साथ वहां उतरने वाले मुसाफिरों को अपने साथ अनहोनी होने का डर सताता रहता है।
अधिकारियों से लेकर सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों तक भी इसकी शिकायत पहुंच चुकी हैं। सभी ने आश्वासन भी दिया है, लेकिन मुसाफिरों की इस मजबूरी और तकलीफ पर रोडवेज अफसरों का दिल अभी तक रत्ती भर भी नहीं पसीजा है। वह अभी तक रोडवेज बसों को शहर के अंदर से लाने-ले जाने के लिए ठोस पैरवी नहीं कर पाए हैं। सिर्फ कोरे आश्वासन देकर यात्रियों को ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी बेवकूफ बना रहे हैं। रोडवेज के अधिकारी इस बेहद गंभीर समस्या पर भी खुद को मजबूर और लाचार दिखाने में ही लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि शहर के लोगों को जाम से राहत दिलाने के लिए ओवरब्रिज का निर्माण किया गया था। ओवरब्रिज को चालू हुए करीब तीन महीने हो चुके हैं। पहले रोडवेज अफसर यह दलील दे रहे थे कि अभी ओवरब्रिज का कागजों में लोकार्पण नहीं हुआ है, इसलिए दूसरे डिपो की रोडवेज बसें अंदर से नहीं आ-जा रहीं। अब पिछले दिनों सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पुल का विधिवत लोकार्पण भी कर दिया।
बावजूद इसके रोडवेज बसों के चालक-परिचालकों की मनमानी बरकरार है। वह आज भी बाईपास से ही बसों को ला-ले जा रहे हैं, जबकि शहर के मुकाबले बाईपास होकर बसों को आगरा और अलीगढ़ की तरफ ले जाने में इस बस चालकों को तकरीबन पांच से छह किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इस पर डीजल की बर्बादी भी होती है, लेकिन चालक-परिचालकों को क्या फर्क पड़ता है। बर्बादी तो सरकारी खजाने के पैसों की हो रही है।
अफसोस तो यह है कि पूरी स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद रोडवेज के हाथरस डिपो के अधिकारी उनकी इस मनमानी पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं, जिससे मुसाफिरों में रोडवेज के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। करीब ढाई साल तक ओवरब्रिज बनने तक शहर के लोगों ने इस समस्या को इस उम्मीद के साथ झेला था कि शायद ओवरब्रिज बनने के बाद शहर के अंदर होकर उनकी यात्रा और सुगम हो जाएगी, लेकिन रोडवेज ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। फिलहाल तो जनप्रतिनिधि भी रोडवेज के अधिकारियों को शहरवासियों के लिए बेहद गंभीर हो चुकी इस समस्या को दूर कराने के लिए दबाव बनाने में नाकाम ही साबित हो रहे हैं। संवाद
बसों को शहर के अंदर से हर कीमत पर गुजरवाया जाएगा। शहर के लोगों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इस संबंध में अधिकारियों से वार्ता कर जल्द सभी बसों को बस स्टैंड होकर निकलवाने की व्यवस्था की जाएगी। किसी को मनमानी नहीं करने दी जाएगी।
-राजवीर दिलेर, सांसद
इस बारे में पता करके बहुत जल्दी बसों को बस स्टैंड पर रुकवाया जाएगा। हर हालत में बसों को शहर से होकर गुजरवाया जाएगा। लोगों को समस्या नहीं होने दी जाएगी।
-हरीशंकर माहौर, विधायक
बीते दिनों ओवरब्रिज का उद्घाटन हो गया है। अब भी आगरा से आने पर बसें बाईपास पर उतार रही हैं। इस कारण शहर के अंदर आने में काफी मुश्किलों से जूझना पड़ता है। जनप्रतिनिधि बसों को शहर से गुजरवाएं। बसों को बस स्टैंड पर ही रुकवाएं।
-कुलदीप कौशिक यात्री
तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज बनने से शहर की सूरत बदल गई है। लोगों को जाम से राहत मिली है, लेकिन बसें शहर के अंदर से नहीं गुजर रहीं। इस कारण खासी मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है।
-बंटी ठाकुर, यात्री
इस संबंध में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) को पत्र लिख दिया गया है। बसों को रुकवाने के लिए बाईपास पर कर्मियों की तैनाती की जाएगी। बसों को बस स्टैंड से गुजरवाया जाएगा। मोहम्मद परवेज, क्षेत्रीय प्रबंधक यूपीएसआरटीसी अलीगढ़