न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सरकार के कृषि कानून वापस लेने के बाद मंडी सीमा के बाहर व्यापार करने वालों खाद्य कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले साल छह जून से जो खाद्य कारोबारी बिना मंडी शुल्क व सुविधा शुल्क दिए व्यापार कर रहे थे, उनको फिर से लाइसेंस लेना होगा। लाइसेंस लेने के साथ डेढ़ प्रतिशत शुल्क अदा करना होगा। कारोबारी फिर से पुरानी स्थिति को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर आए-दिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने कृषि कानून लागू किया तो इससे किराना, लकड़ी, दाल का करोबार करने वालों को मंडी कर से मुक्ति मिली। अब कृषि कानून वापस हो गए हैं। फिर से मंडी में कर प्रणाली लागू हो गई है। एक प्रतिशत मंडी शुल्क व आधा प्रतिशत विकास शुल्क व्यापारियों पर लागू हो गया है। फिर से मंडी से लाइसेंस लेना होगा। इस कारण कारोबारियों की जेब पर अब आर्थिक बोझ बढ़ गया है। संवाद
एक टैक्स देने का वादा फिर हुआ विफल
हाथरस। बीते दिनों व्यापारिक संगठनों ने पीएम और सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें एक देश-एक कर प्रणाली के तहत जीएसटी की तर्ज पर एक ही कर लिए जाने की मांग की गई थी। हाथरस में किराना, लकड़ी और दाल आदि काफी बड़ा कारोबार होता है। फिर से टैक्स लागू होने से व्यापारी चिंतित हैं। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में फिर उगाही का सिलसिला शुरू हो जाएगा। संवाद
114 तरह की जिंस में से फल-सब्जी हैं बाहर
हाथरस। मंडी समिति में कुल 114 जिंस आती हैं, जिसमें फल और सब्जी की 45 तरह की जिंसों को सरकार ने बाहर कर दिया है। इन कारोबारियों को यूजर चार्ज अदा करना है। बाकी सभी कारोबारियों को कर अदा करना होगा, जो मंडी प्रशासन ने लागू भी कर दिया है। मंडी सचिव यशपाल सिंह का कहना है कि कृषि कानून वापस होने के बाद एक प्रतिशत मंडी शुल्क व आधा प्रतिशत विकास सेस लागू हो गया है। कारोबारी अपनी लॉगिन आईडी से गेट पास आदि खुद प्राप्त कर लें। संवाद