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हाथरस : हिंदी बेहद सरल, सहज भाषा, सभी न्यायालयों में हो इसका प्रयोग

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हाथरस : गोविंद उपाध्याय, अधिवक्ता। - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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हिंदी बेहद सरल और सहज भाषा है। इसका प्रयोग काफी आसान है। देश के सभी न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग होना चाहिए, जिससे सभी लोग उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों को अच्छी तरह समझ सकें। यह कहना है अधिवक्ताओं का। अधिवक्ताओं का कहना है कि हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। संवाद
हिंदी का प्रयोग आत्म गौरव बढ़ाता है
हिंदी का प्रयोग आत्म गौरव का भाव बढ़ाता है। अंग्रेजी का मोह छोड़कर हमको दिनचर्या में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग बढ़ाना चाहिए। न्यायालयों में भी हिंदी का प्रयोग व्यवहृत होना चाहिए। हिंदी एक ऐसी भाषा है, जो बनावटी पन से दूर है। इसमें जो बोला जाता है, वही लिखा जाता है और वही पढ़ा जाता है अर्थात हिंदी वैज्ञानिक भाषा है।
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-सीपी शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
प्रदेश के साथ जिले में भी स्थापित है हिंदी विधि प्रतिष्ठान
हमारे देश के न्यायालयों में हिंदी के प्रयोग की बहुत बड़ी आवश्यकता है। चूंकि भारत के सभी राज्यों में व्यक्ति हिंदी में सहज, सरल तरीके से अपने भावनाओं की अभिव्यक्ति कर लेते हैं और दूसरों की अभिव्यक्ति समझ लेते हैं। बहुत दिनों से न्यायालयों में हिंदी के प्रयोग की मांग चली आ रही है। उत्तर प्रदेश में न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाने के लिए हिंदी विधि प्रतिष्ठान की स्थापना डॉ. मोती बाबू द्वारा लखनऊ में राज्य सरकार और न्याय विभाग के समन्वय से कराई गई। इसी शृंखला में जिला स्तर पर भी हिंदी विधि प्रतिष्ठान स्थापित कराया गया। प्रतिष्ठान से स्मारिका पर निर्देशिका भी प्रकाशित हुईं, जिससे तकनीकी शब्दों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा सके। हिंदी का प्रयोग यथार्थ के धरातल पर बढ़ाने की आवश्यकता है।
-हरीश कुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
हिंदी का प्रयोग बढ़ाने की महती आवश्यकता
हिंदी सरल और सहज भाषा है, जिसका प्रयोग बहुत आसान है। गुलामी की मानसिकता के कारण हम लोग अंग्रेजी को महत्व देते हैं और अपनी संस्कृति और भाषा को भूलते जा रहे हैं। ऐसे में हम हिंदी को दोयम दर्जे का स्थान दे रहे हैं। यही मानसिकता हिंदी के प्रचार और प्रसार में बाधक बन रही है। न्यायिक पद्धति भी अंग्रेजों द्वारा बनाई हुई है, जो अब तक चली आ रही है। अब हिंदी का प्रयोग बढ़ाने की महती आवश्यकता है, ताकि लोग माननीय उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्णय को समझ सकें।
-अमर सिंह चंदेल, वरिष्ठ अधिवक्ता
हिंदी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग सभी के लिए लाभप्रद
हिंदी का अपना विशाल और समृद्ध साहित्य है। हिंदी सागर की तरह विशाल संस्कृति और संस्कारों को समेटे हुए है, लेकिन नई पीढ़ी आज हिंदी बोलने और लिखने में संकोच करती है। हिंदी भारत के अधिसंख्यक भू भाग में बोली और समझी जाती है, इसलिए हिंदी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग सभी के लिए लाभप्रद होगा।
-लक्ष्मीकांत सारस्वत, वरिष्ठ अधिवक्ता
संस्कारों को निरूपित करती है हिंदी
भारत की विशेषता विविधता में एकता है। हिंदी के पास अपना विशाल शब्द भंडार और साहित्य है। हिंदी में पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोये रखने की सामर्थ्य विद्यमान है। हिंदी संस्कार निरूपित करती है, इसलिए भारत के गौरवशाली पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक जीवन मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए हिंदी का प्रयोग बढ़ाने की आवश्यकता है और हिंदी को आत्मसात करना भी जरूरी है।
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-गोविंद उपाध्याय, अधिवक्ता जनपद एवं सत्र न्यायालय हाथरस

हाथरस : सीपी शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता। संवाद- फोटो : HATHRAS

हाथरस : लक्ष्मीकांत सारस्वत, वरिष्ठ अधिवक्ता। संवाद- फोटो : HATHRAS

हाथरस : हरीश कुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता। संवाद- फोटो : HATHRAS

हाथरस : अमर सिंह चंदेल, वरिष्ठ अधिवक्ता। संवाद- फोटो : HATHRAS

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