न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिलेभर में रविवार को पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा। पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षा के लिए एक बार फिर बड़ी-बड़ी बातें की जाएंगी। पर्यावरण संपदा को सहेजने के कई दावे किए जाएंगे, लेकिन संरक्षण की बात करना बेमानी है। जिले में कई ऐसी समस्याएं हैं, जो यहां के पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा हैं।
बात चाहे शहर में गंदगी जलभराव की हो या फिर दूषित भूगर्भ जल की। वायुप्रदूषण भी खतरनाक स्तर पर पहुंचने लगा है। गंगा की सहायक नदियां प्रदूषण से मैली हो गई हैं। अब इन्हें संवारने की कोशिश चल रही है। वन्य संरक्षण के नाम पर भी जिले में लकीर पीटी जा रही है। शहर के कुछ इलाकों में जलभराव व गंदगी लोगों की दुश्वारियां बढ़ा रही है। संवाद
लाखों पौधे लगाए जाते हैं, नहीं होती है देखभाल
हर साल जिले में लाखों पौधे जिले को हरा-भरा बनाने के लिए लगाए जाते हैं, लेकिन इनकी देखभाल ही नहीं होती। यह पौधे चंद दिनों में उजड़ जाते हैं और सूख जाते हैं। पौधरोपण के बाद इनकी तरफ कोई देखता भी नहीं है। हाल यह है कि इस साल भी 25 लाख से ज्यादा पौधे रोपने का लक्ष्य है, लेकिन कितने पौधे सुरक्षित रहेंगे, यह अलग बात है।
भूगर्भ जलस्तर में गिरावट बड़ी समस्या
भूगर्भ जल स्तर में गिरावट इस जिले में बड़ी समस्या है। लगातार भूजल स्तर गिर रहा है। जिले के 60 से ज्यादा गांवों के लोग तो खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। यहां का पानी पीने लायक भी नही हैं। नलकूप और सबमर्सिबल धरती की कोख को खोखला कर रहे हैं। इस समय तो यहां 200 फीट तक बोरिंग पर पानी मिलता है। धरती से पानी का लगातार दोहन और जल संरक्षण के पर्याप्त इंतजाम इस जिले में नहीं हैं। यहां काफी पोखर और तालाब सूख गए हैं। कुछ का अस्तित्व समाप्त हो गया है।
खतरे में दुलर्भ काले हिरण
सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव टडी डंडिया क्षेत्र में काले हिरन पाए जाते हैं। इनके संरक्षण के लिए घोषणाएं तो कई बार हुईं, लेकिन इन पर ज्यादा अमल नहीं हुआ। ऐसे में यह दुर्लभ प्रजाति खतरे में हैं। हालांकि वन विभाग द्वारा गर्मी में हिरनों की प्यास को बुझाने के लिए वाटर हॉल बनवा दिए गए हैं। चारे आदि का प्रबंध भी कर दिया गया है। संवाद
नाले का रूप ले चुकी है करवन नदी
सादाबाद। कभी सादाबाद की पहचान रही करवन नदी आज विलुप्त होने के कगार पर है। इन दिनों करवन नदी, नदी कम नाला ज्यादा दिखाई देती है। नदी में जमा गंदगी, सिल्ट और प्रदूषित जल को देखकर नहीं लगता कि यह नदी कभी किसानों को सिंचाई के लिए पानी और लोगों की प्यास बुझाती थी। करवन नदी की हालत देखकर लोग आहत हैं, क्योंकि इसमें सिल्ट, कूड़ा करकट, दूषित जल नजर आता है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। कई सालों से नदी में पानी नहीं आया है। बारिश के दिनों में भी नदी की हालत में सुधार नहीं हो पाता है। करवन नदी कुछ समय पहले आवारा पशुओं के पानी पीने, किसानों के लिए सिंचाई और लोगों की भी प्यास बुझाती थी। अब तो इसका जल प्रदूषित हो गया तो पीने से पशुओं की मौत भी हो जाती है। नदी की हालत में सुधार के लिए अब तक कई लोग प्रयास कर चुके हैं। कस्बे के लोग चाहते हैं कि कम से कम नदी के दोनों ओर पक्की पटरियों का निर्माण हो और इसमें पानी छोड़ा जाए। संवाद
सासनी के गंदे नाले से लोगों का जीना हुआ दुश्वार
सासनी। एक तरफ तो शासन-प्रशासन पर्यावरण के संरक्षण की अलख जगा रहा है तो दूसरी ओर कस्बा सासनी से निकलने वाले गंदे नाले से लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है।प्रदूषण के चक्रव्यूह में घिरे सासनी से निकलने वाले गंदे नाले का पानी तो सिंचाई के लायक तक नहीं रहा। जलीय जीव तक इसमें नहीं पनप पा रहे। नाले के आसपास के लोग तो नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। नाले के आसपास का भूगर्भ भी दूषित हो गया है। लोगों को पीने के लिए भी शुद्ध पानी तक नसीब नहीं होता है। नाले के आसपास खडे़ होने पर प्रदूषण का अहसास होने लगता है। नाले का पानी काला हो चुका है और इससे बदबू आती है। नाले के आसपास रहने वाले लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसी पानी के प्रदूषित होने की सबसे बड़ी वजह अलीगढ़ के कट्टीघरों के अवशेष इसमें प्रवाहित होना है। संवाद
पहले हाथरस अलीगढ़ जिले में आता था। अभी तक अलीगढ़ में भी वाटर ट्रीटमेंट प्लान स्थापित नहीं हुआ है। वहां का कचरा ही जल को दूषित करता है। जल संरक्षण के लिए गंगा समितियां बनाई जा रही हैं। काले हिरन के संरक्षण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रजाति के हिरणों को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यावरण को बचाने के लिए योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
-सीपी सिंह, डीएफओ