न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
गांव में आपसी गुटबाजी की वजह से कई जरूरतमंद लोगों को अभी भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। इस वजह से गरीब लोग तिरपाल डालकर या घास-फूस की झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। सर्दी में इन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं। कार्यालयों में उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।
लोगों का कहना है कि अब वे चक्कर लगाकर थक चुके हैं। स्थानीय गुटबाजी व द्वेष भाव की वजह से उनका नाम सूची में नहीं डाला जाता है। अब तो आवास मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची है। इस बार भी ठंड झोपड़ी में गुजारनी पड़ेगी। संवाद
- मैं भूमिहीन हूं। गांव में कोई जमीन नहीं है। मजदूरी करके परिवार का गुजर करता हूं। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। हर बार कर्मचारी आवास देने का आश्वासन दे कर टरका देते है। - योगेश सिंह
- आवास के लिए कई बार मेरी पड़ताल हो चुकी है, लेकिन आवास नहीं मिला है। दीवार पर टिन शेड डाल कर गुजारा करता हूं। अब सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगा-लगाकर थक गया हूं। - मनोज कुमार
- गांव में मेरी कोई भूमि नहीं है। मजदूरी करके गुजर बसर करता हूं। दीवार पर छप्पर डालकर हमलोग रहते हैं। अब तो प्रधानमंत्री आवास मिलने की कोई आस भी नहीं बची है। - पवन कुमार
- मेरे परिवार की आमदनी का कोई जरिया नहीं है। मजदूरी करके परिवार का गुजर करता हूं। टूटी हुई झोपड़ी में परिवार सहित रहता हूं। आवास के नाम पर बस आश्वासन ही मिलता है। - राम जीवन सिंह
- गांव में कई गरीब परिवार के लोग हैं। इनके पास रहने के लिए कोई आवास नहीं है। इन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए। मैं इनको आवास योजना का लाभ दिलाने की कोशिश करूंगा। - शिव कुमार, ग्राम प्रधान