न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शहर में बजट के अभाव में घर-घर से कूड़ा उठाना बंद हो गया है। इस कारण लोगों को मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। लोग अपने घरों के बाहर या फिर गली और बाजारों में कूड़ा फेंक रहे है। इससे कूड़े के ढेर भी शहर में देखे जा सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि शहर के 17 वार्डों में घरों से सीटी बजाने के साथ कूड़े का संकलन किया जा रहा था। इसके अलावा अन्य वार्डों से नगर पालिका के कर्मी कूड़ा संकलित कर रहे थे। जिस ठेकेदार पर कूड़ा संकलन का ठेका था, पिछले माह उसकी कार्य अवधि समाप्त हो गई। इधर, कोरोना काल के बाद नगर पालिका में बजट का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में घर-घर जाकर कूड़ा संकलन करने का कार्य भी नहीं हो रहा है। एक माह से इसका नया टेंडर भी नहीं उठा है। लोगों को अपने घर के बाहर या चौराहे अथवा गली के नुक्कड़ पर कूड़ा जमा करना पड़ रहा है, जिससे गंदगी को बढ़ावा मिल रहा है।
करीब एक माह से घर पर रिक्शे वाला कूड़ा लेने नहीं आ रहा है। इस कारण कूड़ा डालने के लिए भटकना पड़ रहा है। नगर पालिका को इस व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।
-रितिक उपाध्याय, शहरवासी।
शहर में कूड़ा डालने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। कूड़ा लेने के लिए जो रिक्शा आता था, वह एक माह से बंद है। इस कारण कूड़ा डालने के लिए मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है।
- महेश शर्मा, शहरवासी।
नगर पालिका की कूड़ा संकलन योजना एक साल से चल रही थी। अब काफी समय से घर से कूड़ा लेने के लिए रिक्शे वाला नहीं आ रहा है। इस कारण दिक्कत हो रही है।
-विशाल वार्ष्णेय, शहरवासी
कोरोना काल के बाद ग्रांट कम आ रही है। बजट के अभाव में कूड़ा संकलन योजना बंद हो गई है। अब अगले महीने से बजट मिलने के साथ फिर से इसका टेंडर कराया जाएगा। कूड़ा संकलन योजना को फिर से चालू किया जाएगा।
-आशीष शर्मा, नगर पालिकाध्यक्ष हाथरस।