नगला छत्ती में धहनावर पर झूमते लोग। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी, बिसावर।
रंगों के त्योहार होली पर बिसावर क्षेत्र के गांव नगला छत्ती चौक में धहनावर कार्यक्रम का विशेष आयोजन होता है। धहनावर की परंपरा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। धुलेंडी के दिन पूरा गांव इसमें शरीक होता है। बुजुर्ग लोग बताते हैं कि धहनावर की परंपरा हमारे गांव में अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। इस दिन नगला छत्ती में होली पर धहनावर की गूंज सुनाई देती है।
क्षेत्र के गांव नगला छत्ती के चौक मोहल्ला में अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही ढोल नगाड़ों, ढपली, बजाने की परंपरा (धहनावर) आज भी होली के मौके पर लोगों को झूमने पर मजबूर कर देती है। होलिका दहन के बाद धुलेंडी के मौके पर महिला पुरुषों की टोली गांव की परिक्रमा करती है।
जो पंचमुखी हनुमान मंदिर से शुरू होती है। परिक्रमा के दौरान ढोल-नगाड़े और डफली की गूंज पर लोग थिरकते नाचते गाते नजर आते हैं। परिक्रमा के दौरान फूल, रंग, गुलाल की बारिश होती है। जगह-जगह धहनावर का स्वागत किया जाता है। शाम के वक्त चौक मोहल्ला में पूरे क्षेत्र के लोग रसिया का आनंद लेने के लिए जमा होते हैं।
रसियों ओर ढोल नगाड़ों पर लोग खूब थिरकते हैं। मशहूर रशिया कलाकार लोहरे सिंह पटवारी ओर भीकम सिंह के बीच मुकाबला होता है। देश की आजादी से पहले अंग्रेजों के समय भी पूरे उत्साह के साथ धहनावर निकाली जाती थी। लोगों का भारी मजमा गांव में रहता है। गांव के बुजुर्गों का साफा बांधकर सम्मानित किया जाता है।