न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सादाबाद (हाथरस)
खेती में बिजली की बर्बादी रोकने के साथ वोल्टेज को नियंत्रित करने के उपाय किए जा रहे हैं। अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार ने बताया कि कैपेसिटर लगे होने से एक ट्रांसफॉर्मर से निकलने वाली बिजली सभी में बराबर पहुंचती है। यदि कैपेसिटर नहीं लगा है तो ट्रांसफॉर्मर के निकट के ट्यूबवेल में बिजली का पूरा लोड आता है, लेकिन जैसे-जैसे सिंचाई में बिजली का इस्तेमाल बढ़ता है, दूसरे में वोल्टेज की दिक्कत आ जाती है।
एक्सईएन ने बताया कि सार्वजनिक सूचना जारी करके कैपेसिटर को अनिवार्य किया जाएगा। इसके साथ ही विभाग जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को ऊर्जा संरक्षण के बारे में जानकारी देगा। मुख्य लाइन और एसी के साथ इस उपकरण को लगाया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को दो फायदे होंगे। पहला वोल्टेज की दिक्कत दूर होगी और दूसरा बिल में भी करीब 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकेगी। संवाद
क्या है कैपेसिटर
यह एक प्रकार का उपरकण है, जिसकी मदद से वोल्टेज को नियंत्रित रखा जा सकता है। इससे लाइन हानियों को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है और बिजली के बिल में भी कटौती होती है। यह मुख्य लाइन से आने वाली बिजली बराबर बांटता है, जिससे उपकरणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।