न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। इस बार भाजपा की कोशिश जिले में तीनों विधानसभा सीटों को जीतने की है। पिछले चुनाव में पूरे अलीगढ़ मंडल में केवल सादाबाद सीट ही भाजपा नहीं जीत पाई थी। ऐसे में भाजपा का इस सीट पर खासतौर पर फोकस है। भाजपा लंबे समय से यहां जीत के लिए गुणा-भाग लगा रही है।
उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में हाथरस सदर से हरीशंकर माहौर, सिकंदराराऊ से वीरेंद्र सिंह राना भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत गए थे, लेकिन सादाबाद सीट से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। यहां बसपा के टिकट पर पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने चुनाव जीता था। भाजपा यहां रनर भी नहीं रही थी और रालोद यहां दूसरे नंबर पर आया था। भाजपा को लंबे समय से सादाबाद सीट पर जीत हासिल नहीं हुई। इस बार सियासी समीकरण बदले हुए हैं।
रामवीर उपाध्याय बसपा से निलंबित चल रहे हैं और उनका पूरा परिवार भाजपा में शामिल हो चुका है, लेकिन अभी रामवीर उपाध्याय ने यह फैसला नहीं किया है कि वह किस दल में जाएंगे। भाजपा की कोशिश इस बार सादाबाद सीट को जीतने की है। पूरे अलीगढ़ मंडल में यही सीट ऐसी थी, जिस पर भाजपा को शिकस्त मिली थी। ऐसे में इस सीट पर भाजपा ने शुरू से ही अपने संगठन का ढांचा और मजबूत कर लिया है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यहां आने की संभावना थी, लेकिन वह नहीं आए। माना जा रहा है कि इस माह के अंत तक मुख्यमंत्री सादाबाद आएंगे और इस क्षेत्र के मतदाताओं को कुछ सौगात दे जाएंगे। ऐसे में भाजपा एक तरह से अपनी जीत भी पक्की करेगी। यह इलाका जाट बहुल है। भाजपा ने सादाबाद और मुरसान के कई जाट नेताओं को संगठन में भी जगह दी है। भाजपा ने अपना पूरा जोर इस सीट पर जीत हासिल करने में अभी से लगा दिया है। संवाद